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Charumati Ramdas

Drama Thriller

4  

Charumati Ramdas

Drama Thriller

फैशनेबल वकील

फैशनेबल वकील

7 mins
1

फैशनेबल वकील



नादेझ्दा तेफ़ी

 

अनुवाद

आ. चारुमति रामदास

 

उस दिन अदालत में लोग कम थे. किसी दिलचस्प मीटिंग की उम्मीद नहीं थी. फेन्सिंग के पीछे  - थके हुए और गहरी साँसें लेते हुए तीन नौजवान रूसी कमीज़ पहने बेंचों पर बैठे थे. पब्लिक वाली जगह पर  - कुछ विद्यार्थी और महिलाएँ हैं, कोने में – दो रिपोर्टर्स. अगला केस सिम्योन रुबाश्किन का था. जैसा कि आरोप पत्र में कहा गया था, उस पर इलजाम था अखबार के एक लेख में “प्रथम ड्यूमा भंग करने के बारे में गलत-सलत अफवाहें फैलाने का.”  आरोपी हॉल में मौजूद था और अपनी पत्नी तथा तीन मित्रों के साथ लोगों के सामने घूम रहा था. सभी प्रसन्न थे, परिस्थिति की असाधारणता से उत्तेजित थे, बतिया रहे थे और मज़ाक कर रहे थे. “कम से कम जल्दी ही शुरू कर देते,” रुबाश्किन कह रहा था, “भूखा हूँ, कुत्ते जैसा.”

‘और यहाँ से हम सीधे ‘विएना’ जायेंगे नाश्ता करने के लिए,’ -  बीबी कल्पना कर रही थी.

“हा! हा! हा! जब उसे जेल में बंद कर देंगे, तभी होगा आपका नाश्ता,” स्नेही तंज़ कस रहे थे.

“बेहतर होगा ‘साइबेरिया’ जाना,” – बीबी इठलाते हुए बोली, “हमेशा रहने के लिए. मैं तब किसी और से शादी कर लूंगी.”

स्नेही दोस्ताना अंदाज़ में ठहाके लगा रहे थे और रुबाश्किन का कंधा थपथपा रहे थे. 

हॉल में टेलकोट पहने एक मोटे व्यक्ति ने प्रवेश किया और, धृष्ठता से आरोपी की दिशा में सिर हिलाकर स्टैण्ड के पीछे बैठकर अपनी ब्रीफकेस से कागज़ात छाँटने लगा।

“ये और कौन है?” बीबी ने पूछा।

“हां, ये मेरा एडवोकेट है।“

“एडवोकेट?” दोस्तों को आश्चर्य हुआ। “तुम्हारा दिमाग चल गया है! ऐसे मामूली काम के लिए एड़वोकेट रख लिया!

“हां, भाई, चूजों के हंसने के लिए है. ये करेगा क्या? उसके पास तो कहने के लिए कुछ भी नहीं है! कोर्ट सीधे बर्खास्त कर देगा.”    

“हां मैं, सच कहूँ, तो मैं उसे आमंत्रित करने वाला नहीं था. उसने खुद ही अपनी सेवाएँ पेश कीं. और पैसे भी नहीं लेगा. कहता है, कि हम ऐसे मामलों को सैद्धांतिक तौर पर लेते हैं. मानधन से सिर्फ अपमानित महसूस करते हैं. मैंने, बेशक, ज़िद नहीं की. उसका अपमान क्यों करूँ ?”

“अपमान करना बुरी बात है,” बीबी ने सहमति दर्शाई.

“और फिर, वह मेरा क्या बिगाड़ रहा है? बस, पांच मिनट बकबक करेगा. और, हो सकता है, उससे कोई फ़ायदा ही हो जाए. कौन जानता है? कोई जुर्माना ही लगाने की सोचें, और वो मामला रफ़ा-दफ़ा कर देगा.”

“ऊं-हाँ, ये सही है,” दोस्तों ने सहमति जताई. एडवोकेट उठा, अपने कल्ले सीधे किये, भौंहे चढ़ाईं और रुबाश्किन के पास आया.

“मैंने आपका ‘केस’ देख लिया है,” उसने उदासी से कहा, और आगे बोला, “हिम्मत रखो.”

फिर अपनी जगह पर वापस आया.

“अजीब है!” दोस्त चहके.

“भाड़ में जाए,” रुबाश्किन ने फ़िक्र से सिर हिलाया. “जुर्माने की बू आ रही है.”


****


“कृपया खड़े हो जाएं! जज साहब आ रहे हैं!” अदालत का कारिन्दा चिल्लाया.

आरोपी अपने कठघरे के पीछे बैठ गया और वहां से बीबी और दोस्तों को देखते हुए सिर हिलाया, गर्व और संभ्रम से सिर हिलाते हुए, जैसे कोई घटिया कॉम्प्लिमेंट मिला हो.

“हीरो है!” एक दोस्त ने फ़ुसफुसाकर बीबी से कहा.

“ऑर्थोडॉक्स!” प्रमुख के सवाल के जवाब में आरोपी कह रहा था.

“क्या आप स्वयँ को इस लेख का लेखक स्वीकार करते हैं, जिसे एस.आर. से हस्ताक्षरित किया गया है?”

“स्वीकार करता हूँ.”

“इस ‘केस’ के बारे में और क्या कहना चाहते हैं?”

“कुछ नहीं,” रुबाश्किन को आश्चर्य हुआ.

मगर तभी एडवोकेट उछला. उसका चेहरा लाल हो गया था, आंखें बाहर निकलने को हो रही थीं, गर्दन सूज गई. ऐसा लग रहा था, मानो उसने मटन की हड्डी को दबा दिया है.

“अदालत के सज्जनों!” वह चहका. हाँ, ये आपके सामने है, ये सिम्योन रुबाश्किन. इसने प्रथम ड्यूमा के भंग होने के बारे में लेख लिखा है, और उसका प्रचार भी किया है, ये लेख केवल दो अक्षरों से हस्ताक्षरित है – मगर ये अक्षर एस.आर. हैं. आप पूछेंगे कि केवल दो ही अक्षरों से कयों. तीन से क्यों नहीं, मैं भी पूछूंगा.

इस सौम्य और समर्पित बेटे ने अपने बाप का नाम क्यों शामिल नहीं किया? कहीं ऐसा तो नहीं, कि केवल दो ही अक्षरों एस. और आर. की ज़रुरत थी? कहीं यह भयानक और शक्तिशाली पार्टी का प्रतिनिधि तो नहीं है? जज महोदय! कहीं आप ये तो नहीं सोच रहे हैं, की मेरा क्लाएंट सिर्फ एक अखबार का लेखक है, जिसने एक असफल लेख में गलत वाक्य का इस्तेमाल किया था. नहीं, जज महोदय! आपको उसे अपमानित करने का कोई अधिकार नहीं है, जो, हो सकता है, किसी गुप्त शक्ति को प्रदर्शित करता हो, मतलब, उसके मूल को, मैं कहता, हमारे क्रांतिकारी आन्दोलन के भावनात्मक पक्ष को. उसका अपराध नगण्य है – आप कहेंगे. नहीं! – मैं चाहकूंगा. मैं विरोध करूंगा करता हूँ.”

प्रेसिडेंट ने बेलिफ को बुलाया और उससे विनती की कि आम जनता को हॉल से बाहर जाने के लिये कहे.

एडवोकेट ने पानी पिया और आगे बोला:

“आपको सफ़ेद हैट वाले नायकों की ज़रुरत है! आप नम्र कार्यकर्ताओं को कोई महत्त्व नहीं देते, जो “हाथ ऊपर” चिल्लाते हुए सामने नहीं आते, मगर जो गुप्त रूप से, बिना किसी नाम के सशक्त आन्दोलन का नेतृत्व करते हैं. और, क्या मॉस्को बैंक डकैती के लीडर के सिर पर सफेद टॉप था? और क्या उसके सिर पर सफेद टॉप था, जो वॉन-देर की हत्या वाले दिन खुशी से सिसक रहा था...वैसे, मुझे अपने मुवक्किल द्वारा एक सीमा के भीतर ही अधिकार दिया गया है. मगर इन सीमाओं के भीतर भी मैं बहुत कुछ कर सकता हूँ.”

अध्यक्ष ने दरवाज़े बंद करने और गवाहों को हटाने का आदेश दिया.

“क्या आप यह सोच रहे हैं कि साल भर की जेल आपके लिए इस सिंह को खरगोश बना देगी?”

वह मुड़ा और कुछ पल रुबाश्किन के पसीने से लथपथ, परेशान चेहरे की ओर इशारा करता रहा. इसके बाद, उसने ऐसा दिखाया कि मुश्किल से इस शानदार दृश्य से दूर हो रहा है, और आगे बोला:

“नहीं! कभी नहीं! जेल में वह सिंह की तरह बैठेगा और सौ सिरों वाले हायड्रा के रूप में बाहर आयेगा! वह लिपट जाएगा, अजगर की तरह, अपने भयभीत दुश्मन से, और प्रशासनिक मनमानी की हड्डियां उसके ताकतवर दांतों से चूर चूर हो जायेंगी. क्या आपने उसके लिए साइबेरिया निश्चित किया है? मगर, जज, महोदय! मैं आपसे कुछ नहीं कहूंगा. मैं आपसे सिर्फ इतना पूछूंगा कि गेर्शूनी कहाँ है? गेर्शूनी, जिसे आपने साइबेरिया भेजा था? और किसलिए? क्या जेल, निर्वासन, कठोर श्रम, यातनाएं (जो, सच कहूं तो, मेरे मुवक्किल पर किसी कारण से नहीं दी गईं), क्या ये सारी भयानक यातनाएं उसके कटु होठों से स्वीकारोक्ति का कम से कम एक भी शब्द या उसके हज़ारों साथियों में से एक का भी नाम उगलवा सकती थीं? नहीं, सिम्योन रुबाश्किन ऐसा नहीं है! वह गर्व से सूली पर चढ़ जाएगा, गर्व से अपने जल्लाद को हटा देगा, और धर्मगुरू से कहकर: “मुझे सांत्वना की ज़रुरत नहीं है!!” – खुद ही अपनी गर्वीली गर्दन में फंदा डाल लेगा. न्यायाधीश महोदय! मैं इस महान छवि को “भूतपूर्व” पत्रिका के पन्नों पर, इस महान योद्धा के अंतिम क्षणों के बारे में लिखे मेरे लेख की बगल में देख रहा हूँ, जिसे सैंकड़ों होठों की प्रार्थनाएं रूसी क्रान्ति का अमर नायक बना देंगी. मैं भी उसके अंतिम शब्दों को दुहराऊंगा, जो वह सिर पर बैग चढाने के बाद बोलेगा: “घृणा का नाश हो...”

अध्यक्ष ने सफाई वकील को बोलने से रोक दिया. सफ़ाई वकील ने माफ़ी मांग ली, सिर्फ अपनी दरख्वास्त स्वीकार करने की विनती की, कि उसका क्लाएंट,सिम्योन रुबाश्किन, क्षमा माँगने की दरख्वास्त पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है. 

***

जज मीटिंग के लिए नहीं निकले और उन्होंने फ़ौरन अपराध की धारा बदल दी और नागरिक सिम्योन रुबाश्किन को संपत्ति के सभी अधिकारों से वंचित कर दिया, और फांसी पर लटकाने का हुक्म दिया. अपराधी को संज्ञाहीन अवस्था में मीटिंग हॉल से बाहर ले जाया गया.


*****

अदालत के कैफ़े में नौजवानों ने जोर शोर से एडवोकेट का स्वागत किया. वह प्रसन्नता से मुस्कुराया, झुका, सबसे हाथ मिलाए. इसके बाद सॉसेज खाकर और बीयर का एक गिलास पीकर, अदालत के अभिलेखक को अपनी स्पीच का ड्राफ्ट बनाने के लिए कहा. – “मुझे टाइपिंग की गलतियाँ पसंद नहीं हैं,”  उसने कहा.


****

कॉरीडोर में एक विकृत चेहरे और पीले होंठों वाले सज्जन ने उसे रोका. ये रुबाश्किन के दोस्तों में से एक था.

“क्या वाकई में सब ख़त्म हो गया है? कोई उम्मीद नहीं है?”

एडवोकेट उदासी से मुस्कुराया.

“कुछ नहीं कर सकते! रूसी वास्तविकता का दु:स्वप्न ! ....”


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