फैशनेबल वकील
फैशनेबल वकील
फैशनेबल वकील
नादेझ्दा तेफ़ी
अनुवाद
आ. चारुमति रामदास
उस दिन अदालत में लोग कम थे. किसी दिलचस्प मीटिंग की उम्मीद नहीं थी. फेन्सिंग के पीछे - थके हुए और गहरी साँसें लेते हुए तीन नौजवान रूसी कमीज़ पहने बेंचों पर बैठे थे. पब्लिक वाली जगह पर - कुछ विद्यार्थी और महिलाएँ हैं, कोने में – दो रिपोर्टर्स. अगला केस सिम्योन रुबाश्किन का था. जैसा कि आरोप पत्र में कहा गया था, उस पर इलजाम था अखबार के एक लेख में “प्रथम ड्यूमा भंग करने के बारे में गलत-सलत अफवाहें फैलाने का.” आरोपी हॉल में मौजूद था और अपनी पत्नी तथा तीन मित्रों के साथ लोगों के सामने घूम रहा था. सभी प्रसन्न थे, परिस्थिति की असाधारणता से उत्तेजित थे, बतिया रहे थे और मज़ाक कर रहे थे. “कम से कम जल्दी ही शुरू कर देते,” रुबाश्किन कह रहा था, “भूखा हूँ, कुत्ते जैसा.”
‘और यहाँ से हम सीधे ‘विएना’ जायेंगे नाश्ता करने के लिए,’ - बीबी कल्पना कर रही थी.
“हा! हा! हा! जब उसे जेल में बंद कर देंगे, तभी होगा आपका नाश्ता,” स्नेही तंज़ कस रहे थे.
“बेहतर होगा ‘साइबेरिया’ जाना,” – बीबी इठलाते हुए बोली, “हमेशा रहने के लिए. मैं तब किसी और से शादी कर लूंगी.”
स्नेही दोस्ताना अंदाज़ में ठहाके लगा रहे थे और रुबाश्किन का कंधा थपथपा रहे थे.
हॉल में टेलकोट पहने एक मोटे व्यक्ति ने प्रवेश किया और, धृष्ठता से आरोपी की दिशा में सिर हिलाकर स्टैण्ड के पीछे बैठकर अपनी ब्रीफकेस से कागज़ात छाँटने लगा।
“ये और कौन है?” बीबी ने पूछा।
“हां, ये मेरा एडवोकेट है।“
“एडवोकेट?” दोस्तों को आश्चर्य हुआ। “तुम्हारा दिमाग चल गया है! ऐसे मामूली काम के लिए एड़वोकेट रख लिया!
“हां, भाई, चूजों के हंसने के लिए है. ये करेगा क्या? उसके पास तो कहने के लिए कुछ भी नहीं है! कोर्ट सीधे बर्खास्त कर देगा.”
“हां मैं, सच कहूँ, तो मैं उसे आमंत्रित करने वाला नहीं था. उसने खुद ही अपनी सेवाएँ पेश कीं. और पैसे भी नहीं लेगा. कहता है, कि हम ऐसे मामलों को सैद्धांतिक तौर पर लेते हैं. मानधन से सिर्फ अपमानित महसूस करते हैं. मैंने, बेशक, ज़िद नहीं की. उसका अपमान क्यों करूँ ?”
“अपमान करना बुरी बात है,” बीबी ने सहमति दर्शाई.
“और फिर, वह मेरा क्या बिगाड़ रहा है? बस, पांच मिनट बकबक करेगा. और, हो सकता है, उससे कोई फ़ायदा ही हो जाए. कौन जानता है? कोई जुर्माना ही लगाने की सोचें, और वो मामला रफ़ा-दफ़ा कर देगा.”
“ऊं-हाँ, ये सही है,” दोस्तों ने सहमति जताई. एडवोकेट उठा, अपने कल्ले सीधे किये, भौंहे चढ़ाईं और रुबाश्किन के पास आया.
“मैंने आपका ‘केस’ देख लिया है,” उसने उदासी से कहा, और आगे बोला, “हिम्मत रखो.”
फिर अपनी जगह पर वापस आया.
“अजीब है!” दोस्त चहके.
“भाड़ में जाए,” रुबाश्किन ने फ़िक्र से सिर हिलाया. “जुर्माने की बू आ रही है.”
****
