ANURAG KISHOR

Comedy

4.0  

ANURAG KISHOR

Comedy

पबजी

पबजी

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179



एक महीने से आंखों के सामने वही 10 हजार वाली हसीन मोबाइल फोन का ख्याल था। दिनेश खाने में मोबाइल देखता, पानी में, किताब में, जूते में, अलमारी में, सब जगह मोबाइल ही देखता, पर सच में न देख पाता। सपने तो रोज आते, कभी बुरे, कभी अच्छे। 

अच्छा सपना यह होता कि उसके हाथ में फोन है और वह सेल्फी से लेकर पबजी तक का सफर तय कर लेता और आंख खुलती तो दायें बायें हाथ टटोलने लगता फिर होश आने पर दिन खराब हो जाता। 

पांच महीने से उसने छह हजार जोड़ रखे थे, चार हजार कहाँ से लाए किससे गिडगिडाए? मोबाइल तो दस हजार वाला ही चाहिए वर्ना सुना है पबजी फंसने लगता है। मम्मी से कहता तो वह पापा पर टाल देती और पापा आजकल के पबजी रोग से भलीभाँति परिचित थे। 

उनका एक ही सुर था - "इन्हें मोबाइल नहीं मार चाहिए मार, दिन भर राजा बाबू बने पड़ा रहता है। लिखना पढना है नहीं।भैंस चराना लिखा है इसकी कुंडली में।" 

दिनेश की हिम्मत यहीं हार जाती थी। ये साले मोहल्ले के लौंडे जो न करें। खाने का ठिकाना नहीं, पता नहीं कहाँ से हर महीने मोबाइल बदलते रहते हैं। किसी को पबजी खेलता देख दिनेश विरह वेदना से घिर जाता। 

एक दिन उसने अपनी दिलरुबा की याद में योजना बनाई ताकि कुछ पैसे और इकट्ठा हो सके। 

उसने रद्दी, कबाड़ बेचकर कुछ पैसे बटोरे, साईकिल की हवा निकाल कर मम्मी से पंचर के पैसे लिए, सब्जी के पैसे काटे। अब उसके पास हुए सिर्फ साढ़े छह हजार। कुछ दिन बाद उससे सहा नहीं गया तो उसने साईकिल ही बेच दी और मम्मी से बताया कि चोरी हो गई। 

हां, हां उसे पता था कि देह नरम होगी, परंतु प्यार की जीत भी तो होगी। पैदल चलता देख बाप को कभी न कभी तरस तो आएगी ही। साईकिल पूरे दो हजार में बिकी थी। अब डेढ़ हजार का और जुगाड़ करना था। 

फ़िलहाल! दो हजार की हस्ती क्या है उसे दो जन से मार खा कर पता चला । एक हफ्ते बाद वह मामा के घर जाने की जिद करने लगा जिसका रहस्य आपको पता चल गया होगा। 

किशोरावस्था में मां ने उसे अकेले जाने की इजाजत दे दी मगर इन्हें रहस्य नहीं पता था। 

मामा ने पांच सौ दिए, नानी से पुराने तोहफे के बहाने पांच सौ ऐंठ लिए और जाते-जाते मामी ने भी सौ रुपए पकड़ा ही दिए। अब और चार सौ की जरूरत थी। 

घर लौटकर आया तो माँ को फुसलाकर और मामा के घर की कहानी सुना कर दो सौ ठग लिया। 

सुबह पापा से कांपते कांपते दो सौ मांग लिए। पापा के सवाल पर उसने सीधा कहा- "पिज़्ज़ा खाऊँगा।"कापी किताब कहता तो सुबूत दिखाना पड़ता। 

"ऐं, ये क्या होता है? कहकर पापा ने वह अंतिम धन उसे दान कर दिया।" 

बस अब उससे अमीर कोई नहीं। न एक रूपया कम न एक रूपया ज्यादा। दोस्त को साथ लेकर वह अपनी महबूबा खरीद लाया। 

कितनी सुंदर है न, कैमरा जैसे नागिन की सुंदर आंखें, समुद्र जैसा नीला कवर, परी जैसा स्क्रीन और उसके अंदर हीरे मोती से भी कीमती खजाने। बाकी ऐप हीरे तो पबजी कोहिनूर हीरा और पबजी का हेल्मेट वाला सुपरहीरो देखकर तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। रात भर उसे यकीन नहीं हो पाया कि उसकी पत्नी उसके साथ है। 

      


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