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Aparajita Mishra

Drama

4  

Aparajita Mishra

Drama

पापा

पापा

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“बेटा, बहुत दर्द हो रहा है क्या?” “हाँ पापा।” “बहुत ज्यादा हो रहा है क्या?” “हाँ पापा।” “आपने दवा ले ली फिर भी हो रहा है!” “हाँ पापा!”

सहसा आँख खुल गई मेरी! उनकी आवाज़ आज भी कानों में गूंजती है! कल ही सपने में उन्हें देखा था। जितने प्यार से वो पूछा करते थे जब भी मुझे माइग्रेन का दर्द होता था, वैसा अपनापन तो फिर कभी कहीं और नहीं मिलेगा। उनसे मेरा रिश्ता बहुत अलग था। हम दोस्त भी थे और भाई-बहिन जैसे भी। साथ में हसना और तकिये से उन्हें मेरा मारना, फिर उनके गाल खींचते हुए उनके गले लग जाना। और फिर आती थी उनके चेहरे पर प्यारी सी मासूम हसीं। याद आता है सब...

मुझमें बहुत सारे गुण उनसे ही आए हैं। बहुत ही सलीके से कामों को करना हो या फिर स्वादिष्ट और भिन्न-भिन्न प्रकार का भोजन बनाना हो। चाहे फिर तेज़ गति से खाना हो या शोर शराबे से दूर रहने की आदत हो। सहनशीलता हो या कर्मठ व्यक्तित्व, सब उनसे मिला। रूप भी।

पर कभी-कभी खूबसूरत रिश्तों में भी कुछ अनकही सी दूरियाँ आ जाती हैं। वो मुझे समझते थे, इसका एहसास उनके जाने के बाद हुआ। वह कितने प्यारे पिता थे इसका एहसास भी गहराता चला गया उनके जाने के बाद। बहुत बदल सी जाती है ज़िंदगी, व्यक्तित्व, सोचने का नज़रिया और दुनिया को देखने का ढंग किसी इतने अपने को खो देने के बाद। हर बीतते पल में,वही आख़िरी वक्त उस अपने का याद आता है। एक ‘काश’ हमेशा के लिए मन में घर कर जाता है।

माता-पिता का प्यार सबके नसीब में ताउम्र नहीं होता। पर जिनके पास प्रकृति का यह सबसे अनमोल आवरण है, उन्हें मेरी यही सलाह है कि हर बीतते पल में अपने माता-पिता के प्रति न सिर्फ शुक्रगुज़ार हों अपितु उन्हें समझें, प्यार व सम्मान दें। उनकी चिंता करें, उनके साथ समय व्यतीत करें। यकीन मानें दोस्तों के साथ सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर चैटिंग करने से कई गुणा यह सुखद है। क्यूंकि वक़्त और जीवन आपकी-मेरी पकड़ से बाहर है। जाने आज जो मौका है वह कल मिल पाए या नहीं।

आप सोचते ही रह जाएं की अगले साल उनका जन्मदिन धूम धाम से मनाएंगे, पर उनका अगला साल आ ही न पाए। आप योजनाएं ही बनाते रह जाएं की अगले साल उन्हें ले जाऊंगा किसी तीर्थ स्थल पर या फिर अगले साल उनको तोहफे में यह दूँगा। मामूली मतभेदों की वजह से शायद आप आज उन्हें कह ही ना पाएं की आप उन्हें कितना याद करते हैं, प्यार करते हैं, घर आना चाहते हैं, उनके बिन अधूरे से हैं। और हर बीतता पल जाने कितने मीलों आपको उनसे दूर कर रहा है, यह आप नहीं जानते।

तो जाइये और आज ही उन्हें कह दीजिये जो शायद वो कब से सुनना चाह रहे हों। 


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