नेता बनो
नेता बनो
(एक जगह बोर्ड लगा है... नेता बनने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है।)
(एक हॉल में पाँच-छः लोग बैठे हैं... सामने बोर्ड पर कई बड़े नेताओं के फोटो लगे हैं। उसी समय एक आदमी नेता स्टाइल में
आता है। आते ही मुस्कुराकर कहता है।)
मोहनः
नमस्कार मित्रों...
सभी *"नमस्कार...
मोहनः
आप सभी लोग नेता बनना चाहते हैं....
रमेशः
नेता तो हूँ, अपनी सोसायटी का नेता हूँ- मेरे बिना वहाँ का कोई काम नहीं होता, अब आगे बढ़ना है, अपने पूरी बस्ती के लिए काम करना है....
(सभी हँसते हैं।)
मोहनः
आप यहाँ से जा सकते हैं..... यहाँ नेता मतलब बड़े-बड़े नेता, जैसे (बोर्ड दिखाकर) ये सब है.... यहाँ गली कूचों के टपोरी नेताओं को ट्रेनिंग नहीं दी जाती है।
रमेशः
यार, तुम तो डारेक्ट इनसल्ट करने लगे हो... इतने होशियार हो तो खुद क्यों नहीं बन गये बड़े नेता....
उमेशः
ये भाई चल जा ना काहे को टाइम पास करता है... हम लोगों को तो ट्रेनिंग लेने दो।
(रमेश गुस्से से देखकर जाता है।)
मोहनः तो मित्रों, अब आप पाँच लोग बचे हैं... आप पाँचों में से जो सबसे बेस्ट होगा उसे ट्रेनिंग दी जायेगी... और उसके बाद उसे किसी ना किसी बड़ी पार्टी में इंट्रोड्यूस किया जाएगा, आज हमसे ट्रेनिंग लेकर कई बड़े नेता मिनिस्टर बन गये हैं... हाँ तो, अब मैं आप लोगों से आपके बारे में जानना चाहूंगा।
श्याम*"
नमस्कार.... मेरा नाम श्याम कुमार है। मैंने बीए ठण्म्ण्क्ण् किया पर कहीं भी ढंग की नौकरी नहीं मिली.... तो सोचा, कि नेतागिरी में ही हाथ आजमा लूँ.....
मोहनः
आप टीचर हैं पर बच्चों को पढ़ा नहीं पाये और नेता बनना चाहते हैं। वैसे आपके अंदर नेता बनने की कोई क्वालिटी नहीं है। हाँ.... आप चाहें तो हमारे यहाँ ट्रेनिंग देने का काम कर सकते हैं.....
उमेशः
अबे, ये क्या ट्रेनिंग देगा...इसे तो ख़ुद कुछ पता नहीं है।
प्रदीपः
अबे जिनको कुछ नहीं आता है, वही ट्रेनर होते हैं....
मोहनः
एकदम करेक्ट.... हाँ तो....(उमेश से) आप अपने बारे में बतायें....
उमेशः
भाई, अपुन ने 12th पास किया है, अपुन की बस्ती में अपुन की चलती है.... सिटी में जितने बड़े भाई लोग हैं, सबकी वसूली अपुन करता है। वो क्या है ना अपुन ये सब करके कंटाल गयेला है तो सोचा लोगों का सेवा करने के वास्ते पॉलिटिक्स में एन्ट्री मारूँ....
मोहनः
टपोरी भाई, तुम थोड़ा साइड में बैठ जाओ, बाद में देखते हैं। (प्रदीप से) मित्र आप बतायें....
प्रदीपः
अपना बैकग्राउण्ड थोड़ा गड़बड़ है। 10जी तीन साल में पास किया... नौकरी मिली नहीं तो चोरी करना शुरू किया-दो-तीन बार जेल गया.... फिर गैंग बनाकर लोगों को लूटना शुरू किया, पकड़ा गया, पर हाँ आज तक एक भी केस में सज़ा नहीं हुआ.... मैं सब सेटिंग कर लेता हूँ, अब ये रोज़ रोज़ के छुटपुट काम से तंग आ गया तो सोचा नेता बन जाता हूँ।
मोहनः
हूँ- तुम में कुछ तो क्वालिटी है नेताओं वाली.... बैठो बाकी लोगों को भी देख लेते हैं। (महेन्द्र से)
महेन्द्रः*"
(धीरे से खड़े होकर) देखिए, मैंने एम.ए. किया, कॉलेज में प्रोफेसर था, दिल भर गया एक ही काम से.... तो कुछ अलग करना चाहा.... पर जहाँ गया, हर जगह अराजकता बेइमानी के अलावा कुछ नहीं दिखा, मैं ठहरा ईमानदार आदमी, मैं नेता बनकर ईमानदारी से देश की सेवा करना चाहता हूँ, देश को एक नये आयाम पर पहुंचाना चाहता हूँ।
मोहनः
बस-बस... प्रोफेसर साहब- ये बतायें, देश सेवा के लिए नेता बनने की क्या ज़रूरत है। नेता देश सेवा के लिए नहीं देश लूटने
के लिये होते हैं.... आप जाइये, कोई संस्था वंस्था बनाकर लोगों से भीख मांगिये... और देश सेवा करिये, आप जा सकते हैं....
प्रोफेसर,*"
कमाल है.... ईमानदारी और शराफत की कोई इज्ज़त ही नहीं है।
मोहनः
बहुत है प्रोफेसर साहब... बहुत इज्ज़त है, सिर्फ सोच में हकीक़त में ये सब फालतू बातें हैं... आप जा सकते हैं....
(प्रोफेसर जाता है।)
मोहनः
कमाल है, पिछले 10 दिनों मंे एक भी आदमी ऐसा नहीं आया जिसमें बड़ा नेता बनने की क्वालिटी हो, (लास्ट वाले से) भाई,
अब आप भी बता दो.....
सुरेशः
अब मैं आपकी तारीफ क्या करूँ... मेरे बारे में तो सभी जानते हैं, पर शायद आप लोग न्यूज वगैरह देखते नहीं हैं...
मोहनः
यार ट्रेनिंग से फुर्सत नहीं मिलती....
सुरेशः
हूँ... भाई अब तक 25 फिरौती, 15 मर्डर और छुटपुट केसेज, 100-150 होंगे.... जिनके इल्जाम मुझ पर लगे हैं.... पर साबित
एक भी नहीं हो पाया, अपनी सेटिंग ऊपर से लेकर नीचे तक है। वैसे 30-40 डकैती भी डाली, खूब लूटा है लोगों को, पूरे स्टेट में नाम चलता है अपना...अब छोटे मोटे लूट से ऊब चुका हूँ.... अब पूरे देश को लूटने का इरादा है....वो क्या बोलते हैं स्कैम से... चार बड़े स्कैम करके ऐश करने का है जेल में....
मोहनः
(ताली बजाकर) वाह...वाह.... आज मिला है सही आदमी.... जिसमें नेता बनने के सारे गुण हैं.... बस ज़रूरत है तो उसे
निखारने की...(प्रदीप से) तुम इनके असिस्टेंट बन सकते हो।
सुरेश जी, आप बहुत जल्द ही बचे हुए गुण सीख जाएंगे। वैसे हमारी फीस है पांच लाख रुपये....
सुरेशः
(चौंक कर) अभी तो तुमने बोला था फ्री में ट्रेनिंग देंगे।
मोहनः
यह भी ट्रेनिंग का हिस्सा है। नेता बनने की पहली सीख जो बोलते हैं, वो करते नहीं, फीस तो देनी होगी।
सुरेशः
अपने घर का पता दो।
मोहनः
क्यों....
सुरेशः
अबे किसी ना किसी के घर को लूटूंगा तभी तो पांच लाख लूंगा।
(सब चौंकते हैं।)
