नागिन की आंखों की प्यास
नागिन की आंखों की प्यास
बरसों पुरानी बात है ,जब इंसानी बस्तियों से दूर एक घना और रहस्यमयी जंगल हुआ करता था ।
जहां चमेली और रात की रानी के फूलों की खुशबू हवा ओं में घुली रहती थी , वहीं एक वीरान और प्राचीन खंडहर था । वह जगह दुनिया की नजरों में भले ही डरावनी थी ,पर शिवन्या और शिवान के लिए स्वर्ग से कम नहीं थी।
वे साधारण इंसान नहीं , बल्कि अपनी इच्छा से रुप बदलने वाले इच्छाधारी नाग- नागिन थे ।
हर रात वे वहां मिलते थे , लेकिन पूर्णिमा और नाग पंचमी की रातें उनके लिए सबसे खास होती थीं।
उस दिन वे अपनी परछाइयों से बेखौफ हो के चांदनी की दूधिया रोशनी में झूमते और अपनी रूहानी मोहब्बत का जश्न मनाते थे ।
पर यह सब उन्हें बहुत छिपकर करना पड़ता था।
उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि पास की बस्ती के लालची इंसानों की नजरें कहीं उनके जोड़ें पर न पड़ जाए।
आज फिर पूर्णिमा की रात करीब थी । आसमान में चमकते चांद को देख शिवन्या का मन मयूर की तरह नाच उठा। उसने बड़े प्यार से शिवान की ओर देखा और कहा , "शिवान, आज फिर वहीं जादुई रात आई है आज मेरा मन तुम्हारे संग उन पुराने गीतों पर थिरकने का कर रहा है यही तो वो रात होती है जब हम सच में आजाद होते हैं, वरना बाकी दिन तो हमें दुनिया की नजरों से बचकर एक -दूसरे से दूर ही रहना पड़ता है।"
शिवान के चेहरे पर मुस्कुराहट तो थी, पर आंखों में एक अनजाना डर । उसने सावधानी बरतते हुए चेतावनी दी "शिवन्या , सावधानी ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है । इंसानों की फितरत
पल-पल बदलती है , हमें सम्भल कर रहना होगा।"
पर शिवन्या कहां मानने वाली थी ? पूनम की रात धीरे धीरे अपनी रेशमी आभा बिखेर रही थी।शिवन्या ने बिल्कुल भी देर नहीं की और वह सोलह श्रृंगार कर,
किसी अप्सरा की तरह सज -धज कर उस मिलन स्थल पर पहुंच गई ।उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी ___शायद यह प्यार था,या फिर किसी आने वाले तुफान की आहट
