नागिन की आंखों की प्यास भाग 4
नागिन की आंखों की प्यास भाग 4
शहर की चकाचौंध के बीच शांतनु और सनाया का घर किसी मंदिर से कम नहीं था।
सनाया का प्यार शांतनु के लिए सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि एक तपस्या थी। वह भगवान शिव की अनन्य भक्त थी और रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाकर एक ही मन्नत मांगती थी___शांतनु की लंबी उम्र और उनका अटुट साथ । सनाया ने संकल्प लिया था कि वह हर जन्म में शांतनु को ही अपना जीवनसाथी बनाएगी। उसका यह 'पतिव्रता धर्म' और शिव के प्रति उसकी श्रद्धा ही शांतनु के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का काम कर रही थी।
दूसरी ओर, शिवन्या ने अपना मायाजाल बिछाना शुरू कर दिया था । उसने अपनी सुन्दरता और सम्मोहन का उपयोग कर के शांतनु के मन में जगह बनाने की कोशिश की । वह अक्सर किसी ना किसी बहाने से शांतनु के सामने आती और उसे अपनी मीठी -मीठी बातों के जाल में फंसाती।
नागिन शिवन्या का संकल्प भी बहुत भारी था ___उसे हर हाल में शांतनु के शरीर में अपने शिवान की रूह को वापस लाना था।
जैसे -जैसे दिन बीत रहे थे, शिवन्या को यह एहसास होने लगा कि शांतनु को अपनी ओर खींचना इतना आसान नहीं है।
वह जब भी शांतनु पर कोई तांत्रिक माया या सम्मोहन डालती , सनाया की पूजा और उसके सच्चे प्यार की शक्ति उस वार को विफल कर देती ।
अब पूरी कहानी एक धर्मसंकट पर आकर खड़ी हो गई । एक तरफ शिवन्या का दस साल पुराना इंतकाम
और अपने प्रेमी को वापस पाने की बेताबी , तो दूसरी तरफ सनाया का अटूट विश्वास और सतीत्व ।
क्या नागिन की नफरत और उसकी शक्तियां जीतेंगी? या फिर एक पत्नी की निस्वार्थ भक्ति और महादेव का आशीर्वाद उस नागिन को हार मानने पर मजबूर कर देगा? क्या शांतनु अपनी पत्नी के सच्चे प्यार को पहचान पाएगा , या शिवन्या उसे अपने वश में करके
हमेशा के लिए खत्म कर देगी?
डिस्क्लेमर
यह कहानी एक धारावाहिक श्रृंखल( series ) का हिस्सा है । इस कहानी के भाग 1, भाग 2, और भाग 3 पहले ही मेरी प्रोफाइल में पोस्ट किये जा चुके हैं
तकनीकी कारणों से उन भागों के ( शीर्षक) में 'part'
नहीं लिखा जा सका है।
अंत: पाठकों से निवेदन है कि पूरी कहानी मेरी प्रोफाइल में जाकर अवश्य पढ़ें।
धन्यवाद 🙏🙏
