नागिन की आंखों की प्यास
नागिन की आंखों की प्यास
उसके गहनों की खनक और चेहरे का नूर देख, नाग शिवान की धड़कनें जैसे थम सी गईं। वह मंत्रमुग्ध होकर बस एकटक शिवन्या को निहारे जा रहा था।
रात का अंधेरा जैसे -जैसे हो गया था, दोनों एक-दूसरे
की बांहों में समाकर प्रेम के उस अटटू बंधन में बंध गए। सन्नाटे को चीरती हुई उनके पायल की झंकार और मंद -मंद बहती हवा के बीच दोनों नृत्य करने लगे। वे प्यार और नृत्य के उस जादुई संसार में इतना खो गए कि उन्हें समय के बीतने का जरा भी अहसास नहीं रहा।
शांति के उस माहौल को किसी के भारी जूतों की आहट ने कुचल दिया। इससे पहले कि शिवान और शिवन्या कुछ समझ पाते , एक आदमी ने चीख चीखकर पूरे गांव को वहां इकट्ठा कर लिया।
मशालों की रोशनी और हाथों में लाठी -डंडे लिए गांव वाले काल बनकर उन पर टुट पड़े ।
हमला इतना अचानक और जोरदार था कि सम्भलने का मौका ही नहीं मिला।
शिवान ने अपनी जान की परवाह न करते हुए शिवन्या के आगे ढाल बनकर उसे बचा लिया , लेकिन वह खुद लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा ।
वह बुरी तरह घायल हो चुका था।
जब वह जालिम भीड़ उन्हें अधमरा छोड़ कर चली गई , तब शिवन्या कांपते कदमों से अपने शिवान के पास पहुंची । शिवान की आंखों पथराई हुई थीं और वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था । शिवन्या ने उसे अपने बाहों में भरकर जोर- जोर से पुकारा ,
"शिवान! आंखें खोलो शिवान! मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगी।"
वह उसे उपचार के लिए शिव मंदिर या किसी सुरक्षित जगह ले जाने की कोशिश करने लगी , लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शिवन्या के हाथों में ही शिवान का शरीर ठंडा पर गया ।
उसकी सांसें थम चुकी थीं।
शिवन्या की चीख रात के सन्नाटे को चीरती गई।
शिवान अब इस दुनिया में नहीं रहा था, और इसी के साथ शुरू हुई एक ऐसी 'प्यास' जिसे अब सिर्फ गुनहगारों का लहु ही बुझा सकता था।
