मेरी पहली हवाई यात्रा (हास्यकथा)
मेरी पहली हवाई यात्रा (हास्यकथा)
सुबह-सुबह अमन की आँख खुली... आदतन यूँही कुछ देर चादर लपेटे पड़े-पड़े छत देखता रहा... फिर उसने जोरदार अँगड़ाई ली और उठ बैठा... वह बिस्तर से उतरने को हुआ तो सिरहाने मेज पर पड़ा रंगीन लिफाफा दिखाई दिया..
जिज्ञासावश हाथ बढ़ाकर लिफाफा उठाया और खोल लिया... फिर क्या था लिफाफा खोलते ही अमन खुशी से उछल पड़ा... क्योंकि अंदर हवाई जहाज का कश्मीर यात्रा का टिकट था... तभी घरवालों की आवाज में हैप्पी बड्डे की धुन सुनाई दी।
अब तो उसकी खुशी का ठिकाना ही न था... आखिर यही तो सपना था उसका... हवाई जहाज में बैठना और कश्मीर की सैर... और आज दोनों सपने एकसाथ पूरे हो रहे थे...🥰
खैर, अगले ही दिन की टिकट थी... सो घरवालों की सलाह पर शाम को बाजार से कश्मीर में पहनने लायक कपड़े और अन्य सामान खरीद लाया... और इसतरह जोरशोर से यात्रा की तैयारियाँ पूरी कीं।
अमन अगली सुबह बनठन कर एयरपोर्ट पहुंचा और जैसा सुना था वैसी चैकिंग से गुजरकर एयरपोर्ट की बस मे बैठा और हवाई जहाज में उड़ने के खयाल से मन ही मन फूलता हवाई जहाज की सीढ़ियों तक जा पहुंचा...😚
फिर जब अमन हवाई जहाज में घुसा तो उसे और भी आनंद आ गया, क्योंकि उसने देखा की उसे खिड़की के करीब वाली मनपसंद सीट मिली है।
अब क्या पूछना था.... वो खुशी-खुशी अपनी सीट पर जा बैठा... कुछ देर के सफर में अभी वो खिड़की से बादलों को देखकर मगन हो ही रहा था कि अचानक उसे लगा कि उसके ऊपर जूते जैसा कुछ गिरा है।
वो पूछने ही वाला था कि ये किसने फेंका है कि तभी पीछे से मां की झल्लाती हुई आवाज सुनाई पड़ी..........
"नालायक! दोपहर तक सोता रहेगा, आज फिर कॉलेज लेट पहुँचेगा, सोना और सपने देखना बस यही काम रह गया है नासपीटे को..."😲
अमन हैरान.... 'मां प्लेन मे कब आई?'
अभी वो पलट कर मां से पूछने ही वाला था कि बेचारा सीट से सरककर नीचे गिर पड़ा।
और बस आँख खुल गई... वो सोचने लगा......
'उप्स... तो यह सपना था? 'हाय.., कितना सुंदर सपना था... पर न जाने मां को मेरे सपने से क्या दुश्मनी है कि... मेरे हर सुंदर सपने मे 'अमरीश पुरी' बनकर आ जाती हैं... उफ्फ! आसमान से गिरा सीधा जमीन पर।'...😒
लेकिन अब और क्या हो सकता था.......
और, तभी अचानक मां की झल्लाती आवाज के साथ जूते की दूसरी जोड़ी भी उसपर आकर गिरी.... अमन ने गहरी सांस ली और सोचा, 'बस यही बाकी था'.... और फिर वो मुस्कुराते, चादर लपेटते, जमीन से उठ खड़ा हुआ।
खैर, सपने के बहाने ही सही उसे सारे दिन अपने सहपाठियों से 'पहली हवाई यात्रा' का किस्सा बयान करने को मजेदार मसाला मिल गया था...।।😂🤣
✍️अमिता मिश्रा 'निःशब्द'
