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अमिता मिश्रा 'निःशब्द'

Drama Inspirational Others

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अमिता मिश्रा 'निःशब्द'

Drama Inspirational Others

डिजिटल नेटवर्क📱 Vs मन का स्पर्श...👨‍👩‍👧‍👦👵

डिजिटल नेटवर्क📱 Vs मन का स्पर्श...👨‍👩‍👧‍👦👵

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"📱बिना सब्स्क्रिप्शन का 'लाइव' शो...👨‍👩‍👧‍👦👵"

शाम की चाय के साथ, आज के दौर की एक छोटी सी झलक... ☕


शाम के समय डाइनिंग टेबल पर पूरा परिवार जुटा था, पर सब अपनी-अपनी दुनिया में खोए थे। सबके हाथों में चमकती स्क्रीन थी और नज़रें उसी पर टिकी थीं। टेबल के एक कोने में बैठी दादी माँ शांति से मुस्कुराते हुए सबको देख रही थीं।

बेटे ने मोबाइल से नज़र हटाए बिना ही पूछा, "माँ, आप बोर नहीं हो रहीं?"

दादी माँ ने धीमे से कहा, "नहीं बेटा, मैं तो तुम सबको 'लाइव' (Live) देख रही हूँ... बिना किसी सब्सक्रिप्शन के।"

बेटे की उँगलियाँ स्क्रीन पर ठिठक गईं। उसने चेहरा उठाकर माँ को देखा। तभी मोबाइल में डूबा पोता चहका, "दादी! ये कौन सा इंटरेस्टिंग काम है?"

दादी सहज भाव से बोलीं, "बेटा, जब तुम स्कूल में होते हो या पिता काम पर, तब तुम सब मेरे लिए किसी 'प्रीमियम सब्सक्रिप्शन' जैसे हो जाते हो—जिसे न मैं रोक सकती हूँ, न देख सकती हूँ। लेकिन अभी, इस वक्त तुम सब मेरे सामने हो। मैं तुम्हें देख रही हूँ, सुन रही हूँ और देखो... 'लाइव चैटिंग' भी कर रही हूँ। जो तुम उस छोटी सी स्क्रीन पर ढूंढ रहे हो, उसे मैं साक्षात जी रही हूँ। मेरे लिए तो यह 'लग्जरी पल' है, शायद किसी दिन तुम भी यह लग्जरी जीना चाहो।"

कमरे में सन्नाटा छा गया। एक-एक करके मोबाइल मेज पर रख दिए गए और उस शाम, सच में 'नेटवर्क' जुड़ गया। वो भी बिना किसी डेटा पैक या अतिरिक्त भौतिक साधन के।

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"दोस्तों! यह सिर्फ कहानी नहीं, आज की विडंबना है। जो साधन दूरियाँ घटाने के लिए बने थे, वही आज फासले बढ़ा रहे हैं। हम भूल गए हैं कि वास्तविक जुड़ाव 'सिस्टम' से नहीं 'स्पर्श' से होता है। सुदूर बैठे व्यक्ति में संतोष ढूँढने की कोशिश में हम बगल में बैठे इंसान से तार जोड़ना ही भूल जाते हैं। नतीजा? हाथ खाली रह जाते हैं।

दूर के रिश्ते खूबसूरत होते हैं, उन्हें ज़रूर सहेजिये, पर याद रखिये कि वे अक्सर 'आर्टिफिशियल ज्वेलरी' जैसे होते हैं—दिखने में सुंदर, पर संकट में मूल्यवान नहीं। आपकी अपनी 'ओरिजिनल ज्वेलरी' तो आपके पास मौजूद आपके अपने लोग हैं। अगर उन्हें आज नहीं पहना और सहेजा, तो एक दिन शायद आप उन्हें पहनने लायक ही न रहें। आर्टिफिशियल गहनों से जीवन सजाइये, पर असली की हिफाजत करना मत भूलिए।"

✍️ निःशब्द की कलम से... 💐

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✍️अमिता मिश्रा ‘निःशब्द’

🖌️तस्वीर जैमिनी की सहायता से निर्मित


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