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Punam Banerjee

Inspirational


5  

Punam Banerjee

Inspirational


मांगलिक

मांगलिक

9 mins 413 9 mins 413

स्कूल की मीटिंग ख़तम होते ही मैंने टैक्सी ली और घर की ओर भागी.पता नहीं क्यूं आज निकिता (मेरी बहु) और मेरे बेटे साहिल ने मुझसे प्रामिस लिया था कि शाम के 6 बजे तक घर पहुँच जाऊं. मैंने बहुत बार पूछा कि आखिर ऐसी क्या इमरजेंसी आ गयी,पर वो बस एक ही बात दोहराते रहे,"अभी नहीं,शाम को पता चलेगा,पर आप वादा करो,जल्दी आ जाओगे.”

वैसे मै कभी कभी दोनों को घर में अकेले रहने का मौका भी देती हूँ. उन दोनों की याद आते ही मेरे होंठो पर मुस्कराहट आ गयी. 5 साल हो गए थे शादी के ,पर अभी भी नए जोड़े जैसे दीखते थे | दोनों साथ ऑफिस जाते,साथ वापस आते, फिर निकिता रसोई में मेरा हाथ बटाने आ जाती तो पीछे पीछे मेरा बेटा साहिल भी. मै कहती, ‘जाओ तुम दोनों आराम करो,थके होंगे.” तो वही मुझे रसोई से बाहर निकाल देते ,ये कहते हुए,"अब हम दोनों रसोई संभालेंगे,आप जाकर अपने पोते के साथ खेलो.बेचारा कब से अपनी दादी को याद कर रहा है. मै समझती थी सब कुछ. दोनों की गुटर गुं में मेरा कोई काम नहीं सोचकर अपने पोते अंशुल के पास चली आती,जो मुझे देखते ही मुझसे लिपट जाता.

............................

ट्राफिक जाम के की वजह से टैक्सी रुक गयी थी,पर मेरी यादें नहीं रुकी थी.मुझे आज भी उस दिन की तस्वीर साफ़ नजर आती है ,जब साहिल की 25 वीं जन्मदिन पर मैंने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा था, ‘बेटा खूब उन्नति कर अपनी नौकरी में,जिंदगी में खूब आगे बढ़ना और लम्बी उम्र मिले मेरे बेटे को.’ तो उसने अपना सर मेरे गोद में रखते हुए पूछा था, ‘माँ ,क्या आशीर्वाद सच होते हैं?’

मैंने प्यार से कहा था, "हाँ बेटा,बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद न मिले तो हम कुछ नहीं कर सकते,और माँ का आशीष बच्चों को हर मुश्किलों से बचाता है.”

साहिल ने पूछा था ,"आप का आशीष भी तो मुझे हर मुश्किल से बचाएगा न?"

मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा था,"जरुर बेटा.और आपने कभी कोई गलत काम नहीं किया,तो फिर आप पर कोई मुसीबत आएगी ही क्यों ?"

साहिल ने झिझकते हुए कहा था , “माँ ,मै आज अपने जन्मदिन पर आपसे कुछ मांगना चाहता हूँ."

मैंने बड़े आश्चर्य से उसे देखा ! साहिल बड़ा ही शांत और होनहार बच्चा था,उसने न कभी कोई जिद की,न कभी कोई चीज मुझसे मांगी.बचपन से ही अपना काम खुद करता ,मेरी मदद करता और पढ़ाई में अव्वल था,जभी तो पढ़ाई समाप्त होते ही उसे अच्छी नौकरी मिल गयी थी.

उसने मुझे चुप देखकर कहा ,"माँ ,मैंने अब तक आपसे कभी कुछ नहीं माँगा, मै कोई गलत मांग नहीं रखूँगा."


मैंने उत्तर दिया था, "मुझे पता है बेटा ,बचपन में तो नहीं माँगा,अब मेरा कमाऊं बेटे को क्या जरुरत पड़ गयी माँ से,यही सोच रही हूँ".

साहिल ने मेरे हाथ को पकड़ते हुए धीरे से कहा था,"माँ,मै एक लड़की से प्यार करता हूँ."


वैसे तो मुझे साहिल जैसे शांत और शर्मीले लड़के से ,जो कभी किसी लड़की की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखता था,ऐसी उम्मीद नहीं थी. पर दिल ने कहा ..जरुर कोई खास लड़की होगी जिसने साहिल को उसकी ओर झुकने को मजबूर कर दिया है. पर शायद और आगे बढ़ने से पहले मेरे बेटे को मेरी इज़ाज़त चाहिए थी. इसलिए मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया ,” चल अच्छा हुआ,तूने खुद अपने पसंद की लड़की चुनकर मेरी टेंसन कम कर दी."


पर साहिल इसके जवाब में चुप रहा. उसके माथे पर उभरी सलवटें साफ़ बता रही थी कि कुछ समस्या जरुर है. मैं ये सोचकर कांप गयी कि कहीं कोई बड़ी प्रॉब्लम ना हो,जिससे मेरा बेटा इतना चिंतित है.”

मैंने उसके हाथों को सहलाते हुए धीरे से पूछा , “क्या बात है साहिल?”

पर उसने जवाब में एकबार मेरी ओर देखा और अपनी नाख़ून कुतरने लगा. इसका मतलब था कोई गंभीर समस्या है.

मैंने चिंतित होकर पूछा, “तो क्या वो हमारे ख़ानदान से नहीं है?”

साहिल ने तुरंत जवाब दिया, " नहीं माँ,वो हमारे खानदान की है,बहुत खुबसूरत और होशियार है. कल ही उसका रिजल्ट आया है,फर्स्ट क्लास मिला है बी.ए.में ".

मैंने आश्वस्त होकर कहा ,"तो फिर क्या दिक्कत है?.उनके घर वाले नहीं मान रहें हैं?मुझे ले चल उनके घर,तू इतनी अच्छी नौकरी करता है,वो क्यों नहीं मानेंगे?"

साहिल ने सर हिलाते हुए कहा, "नहीं माँ,उसके घर वालों को तो पता भी नहीं."

मुझे अब उसकी ये बातों की आँख मिचौली अच्छी नहीं लग रही थी. मैंने अपना धीरज खोते हुए कहा,"देख बेटा, मेरी जान मत सुखा,सीधी तरह बता,क्या बात है?क्या वो लड़की तुझे पसंद नहीं करती?"

साहिल ने तुरंत जवाब दिया,"नहीं माँ,हम एक दुसरे से बहुत प्यार करते हैं."और कहते ही शर्म से अपनी गर्दन झुका ली.

अब मैं थोड़ी झुंझलाकर बोल पड़ी, "ये नहीं,वो नहीं....बेटा पहेलियाँ मत बुझा.साफ़ साफ़ कह क्या प्रॉब्लम है?”

साहिल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा ,"माँ वो मांगलिक है."

मै चुप थी! वो मांगलिक है,पर साहिल नहीं...और मांगलिक किसी और से शादी नहीं कर सकते वरना उसके जीवन साथी के प्राणों का संशय हो सकता है. पर साहिल उससे प्यार करता है और इन बातों को बिलकुल नहीं मानता है. और मेरी बात कहो तो, मुझे खुद पता नहीं मैं इसे मानती हूँ या नहीं,क्योंकि ऐसे हालात कभी बने ही नहीं जो मुझे इस विषय पर सोचने पर मजबूर करे.

साहिल मुझे चुप देखकर घबराया हुआ कह रहा था,"माँ.मै जानता हूँ,आप ये सब नहीं मानती.मै निकिता के बिना जी नहीं सकता माँ,

प्लीज माँ |"

मैंने अपनी चुप्पी तोड़ी ,"लेकिन,मै इसमें क्या कर सकती हूँ?"


“बस माँ,आप निकिता और उसके घरवालों को बताना ,मै भी मांगलिक हूँ.मैंने पंडितजी से बात कर ली है,वो मेरी जन्मकुंडली बदल देंगे.”

"क्या निकिता को पता है कि तू मांगलिक नहीं है?"

"नहीं माँ,अगर उसे पता चल जाये,तो वो मुझसे शादी करेगी ही नहीं, उसीने कहा है माँ कि अपनी कुंडली पता कर आओ,अगर तुम मांगलिक नहीं हुए तो मै तुमसे शादी नहीं करुँगी क्योंकि मैं तुम्हारा बुरा कभी नहीं सोच सकती.”

"लेकिन बेटा,वो तो तुझसे प्यार करती है ना?"

"हाँ माँ,इसीलिए तो मेरा कुछ अमंगल हो , नहीं चाहती . और आप तो ये सब बातें नहीं मानती न माँ?”

उसके आँखों में आशा की झलक थी कि मैं उसके हाँ में हाँ कहूँगी पर मैं बुरी तरह संशय के बादल में घिर चुकी थी. हाँ ,मै शायद नहीं मानती,पर ये तो मेरे इकलौते बेटे की जिंदगी का सवाल था,मै कैसे उसे दाँव पर लगा सकती थी? मैंने बड़ी मुश्किल से कहा,"बेटे ये तो हमारे संस्कार हैं...

साहिल ने मेरी बात बीच में ही काट दी,"नहीं माँ,ये हमारे संस्कार नहीं,ये तो कुसंस्कार है,अन्धविश्वास है..आपने ही मुझे सिखाया था न?"

'बेटा ,मै तेरी माँ हूँ,मै जानती हूँ, ये सब गलत बातें हैं,पंडितों के बनाये हुए ,धर्म के नाम पर गलत चीज़ें..पर मै अपने बेटे को ही कैसे..."मैंने अपनी बात अधूरी छोड़ दी.

"पर माँ, आप ही तो कहती हैं न कि समाज के बनाये गलत नियम को,रीति –रिवाज़ को तोड़ने की शुरुआत खुद से ही करनी पड़ती है, आप ने ही मुझे सरोजिनी नायडू की कहानी सुनाई थी न कि कैसे वो जाति प्रथा को गलत साबित करने के लिए खुद ब्राह्मण होते हुए भी उस समय नीची जाति मानी जाने वाली नायडू से शादी की थी.”

मै बस इतना ही बोल पाई थी,"बेटा,मुझे थोड़ा सा वक़्त दे,सोचने के लिए."

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एक हफ्ता गुजर गया था ,पर मै कोई भी निर्णय नहीं ले पाई थी.अगर कोई दूसरी समस्या होती,तो शायद मै उसे अब तक सुलझा लेती,पर यह तो जिंदगी का सौदा था. आज मै समझ रही थी कि भले ही हम बड़ी बड़ी बातें करें,आधुनिक बनने का,कुसंस्कारों,अंध विश्वासों को त्यागने का,बड़े बड़े भाषण झाड़कर महान बनने का नाटक करें, पर हम तो वही अटके हुए हैं,जहाँ हमारी नानी- दादी थी.कुछ नहीं बदला था.स्कुल में बच्चों को कितनी ज्ञान भरी बातें सिखाती और खुद वही पुरातन पंथी बनी हुई थी.

इसी उधेड़बुन में मैंने एक हफ्ता निकल दी.मै जानती थी मेरे साहिल को मेरे फैसले का इन्तजार था ,जब भी मै उसके सामने आती,वह बड़ी आस भरी निगाहों से मुझे देखता,और मै व्यस्त होने का बहाना कर निकल जाती.

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मेरा स्कूल घर से काफी दूर था,इसलिए मुझे अक्सर लौटने में देर हो जाती थी. ज्यादातर दिन साहिल मेरे से पहले ही आफिस से लौट आता और मेरे लिए मेरी पसंदीदा लस्सी बनाकर रखता. एक दिन जब मै स्कुल से वापस आई तो घर में एक नए मेहमान को पाया, साहिल ने उसके साथ मेरा परिचय कराते हुए कहा ,"माँ,ये निकिता है."

उस प्यारी सी लड़की ने झट से मेरे पाँव छू लिए और बड़ी ही मीठी आवाज़ में बोली, "आंटी,आप बैठो,मै आपके लिए लस्सी लाती हूँ." मै अवाक् सी उसे देख रही थी! मुझे गर्व हुआ अपने बेटे के पसंद पर ,"कितनी खुबसूरत! कितनी सभ्य! कितनी प्यारी! मेरे बेटे को यह परी कहाँ मिल गयी!”

मै अपनी भावनाओं में खोई हुई थी,तभी उसकी आवाज सुनाई दी,"आंटी आपको भूख लगी होगी,मैंने आपके लिए 'उपमा' बनाया है. आप पहले खा लें,तब तक मै आप के लिए लस्सी बनाती हूँ. लग रहा था,मै उस घर में मेहमान हूँ और वो मेजबान. मैंने चुपचाप उपमा खाया और फिर स्वादिस्ट लस्सी ली. मै समझ चुकी थी, मेरा बेटा मुझे मन में घुमड़ते भंवर से निकलने में मदद कर रहा है.उसे अपने पसंद पर पूरा विश्वास है और अपनी माँ के दिल को भी समझता है इसलिए निकिता को घर लेकर आया है. हम तीनों ने कई घंटे साथ बिताये.

उसके बाद मुझे निर्णय लेने में एक क्षण भी नहीं लगे. मेरे बेटे ने जो हीरा चुना था,मै उसे यों ही नहीं खो सकती थी.मैंने देखा वो घर जाने की आज्ञा मांग रही थी.मैंने आशीर्वाद देते हुए कहा,

" साहिल बेटा ,इसे घर छोड़ आओ,और निकिता बेटा ,आपके पापा का नंबर मुझे देना. मुझे अब आपके हाथों की लस्सी और उपमा रोज चाहिए."

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ड्राईवर की बातों से मै अपने ख्यालों से लौट आई,"दीदी जी ,आपका घर आ गया ".

मै जैसे ही घर में घुसी ,अचानक ढेर सारी रंग बिरंगी बत्तियां जल उठी और पुरे घर में ‘हैप्पी बर्थडे टु यू ‘की आवाज लहराने लगी. मैंने देखा, साहिल ,निकिता और उनके सारे दोस्त मौजूद थे. अभी याद आया आज मेरा जन्मदिन था.मै अवाक् सी देख रही थी,सारे घर को उन्होंने कितनी खूबसूरती से सजाया था! निकिता आगे आकर मेरा हाथ पकड़ते हुए बोली,"जन्मदिन मुबारक हो मम्मी जी.”

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पार्टी ख़त्म हो चुका था.मै तो जैसे एक सपने के दौर से गुजर रही थी,एक सुन्दर ,सुहाना सा सपना.कभी सोचा ही नहीं था,मै भी किसी के लिए इतना महत्व रखती हूँ,कोई मेरा भी जन्मदिन याद रखेगा. साहिल ने बताया ,'ये सारे इंतजाम निक्की ने ही किये हैं.'

मै दिल में तो बहुत खुश थी,पर झूठमुठ निक्की को डांटते हुए कहा था,"क्या जरुरत थी इतनी मेहनत करने की?”

निक्की ने प्यार से मेरे गले में अपनी बाहें डालते हुए कहा,"मेरी प्यारी माँ के लिए मै कुछ भी कर सकती हूँ.आपने मुझे जो उपहार दिया है ,उसका तो मै कभी भी मोल नहीं चूका सकती. बस आपके इस शुभ दिन पर मेरी तरफ से आपको ये छोटा सा उपहार".

मैंने देखा,उसके हाथ में मेरी पसंद की रिष्टवाच थी ,जिसे खरीदने का जिक्र मैं कई दिनों से कर रही थी पर समयाभाव के कारण नहीं हो रहा था. उसने मेरे हाथों में घड़ी पहनाकर मेरे पैर छु लिए और भर्राए स्वर में बोली, “मम्मी जी,बस यही आशीर्वाद देना,हम सब यों ही हर घड़ी साथ रहें.”

मैंने उसे गले से लगा लिया और दिल में बस यही ख्याल आया,

 ‘जिसके शुभ कदम घर में मंगल ही मंगल करे,वो क्या मांगलिक हो सकती है? शायद हमे मांगलिक का सही अर्थ ही नहीं पता.’

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