Living Room
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जिंदगी मौसम की तरह होती है। कभी सर्दी की तरह शर्द, कभी गर्मी की तरह गर्म और कभी बरसात के मौसम की तरह सुहानी, वैसे तो हर मौसम का अलग ही मजा है पर जब कोई मौसम हद से ज्यादा चले या कम चले तो जिंदगी जीने की मजा काम ज्यादा होती है। कैसे मौसम करवट बदलता है वैसे ही जिंदगी भी वक्त बे वक्त करवट बदलती रहती है। पर जिंदगी में कभी कभी अचानक से हो गई करवट का जवाब मुस्किल हो जाता है।
ये कहानी भी एक ऐसी ही करवट की है जहा सर्द रातों की कुछ बात और कुछ अधूरी मुलाकात ने अचानक से सामान्य से चल रहे राजवीर के जीवन को तूफान कर दिया।
राजवीर बहोत ही सीधा और सामान्य घर का लड़का था, गांव से बस शहर की तरफ आया ही था कुछ पैसे कमाने को, उसकी जिंदगी में बहोत कम रंग थे, जिसमे से वो अच्छे रंग को साथ में रख कर खुश रहता था।
आओ चलो मैं तुमको राजवीर की जिंदगी में पल पल बदलते रंगो की दुनिया में ले जाता हूं जहा वक्त बे वक्त कुछ रंग गहरे तो कुछ फीके हो कर राजवीर की दुनिया को कितना रंगीन बनाते थे।
दिसंबर का महीना था राजवीर के एक दोस्त की शादी में राजवीर पोहचते ही, खाने की प्लेट उठा ली, खाना हालाकि इतना खास नही था पर एक बाप ने अपनी सारी पूंजी लगा दी थी खुद की बेटी की शादी में इसलिए उस वक्त बहुत ही स्वादिष्ट लग रहा था। अचानक से दूल्हे की बहन की आवाज सुनी, ध्वनि एक लड़की बाजू में खड़ी पलट के हा बोल, राजवीर उसको अपलक देखते ही जा रहा था जैसे रेगिस्तान में गुम हुए एक शख्स को जल नजर आया हो।
कितना सौम्या,कितना सरल व्यक्तित्व राजवीर तो जैसे खो सा गया ध्वनि की सादगी में, राजवीर ध्वनि को अपलक निहारे जा रहा था, ध्वनि जो इस बात से अनजान सागर की लहर की तरह खुद में ही खोई हुई थी, सूरज की कमी तो थी पर चांद की रोशनी उसके चेहरे को एक अलग चमक दे रही थी जो सिर्फ राजवीर देख सकता था। अरे राजवीर कहा ख गए आशीष ने कहा, राजवीर कुछ बोला नहीं पर सचाई तो ये थी के, ध्वनि की आंखों ने वो खुद को ढूंढ रहा था। वैसे तो राजवीर काफी बातोनी था पर ध्वनि जन एक बार पास आके बैठी तो कुछ चाहते हुए भी बोल ना पाया। उस रात को कुछ ख़स बाते नही हुए पर दूसरे दिन राजवीर ने आशीष से ध्वनि की इंस्टा आई डी पर मैसेज किया, उसे लगता था वैसे ही ध्वनि ने भी कुछ ही देर में जवाब दिया, थोड़ी देर बाते चली, कुछ दिन और कुछ महीने, राजवीर की ध्वनि से प्यार हो चुका था। राजवीर को जो ध्वनि के साथ महसूस हो रहा था उसने आजतक किसी और के साथ महसूस नहीं किया। चल पड़ा बे मन से घर की तरफ, कुछ बंदिशे एक रिश्ते में होती है पर ध्वनि के स्वभाव से अपरिचित, राजवीर एक अच्छी सी दोस्ती को प्यार समाज बैठ था, एक बार बातो ही बातो में राजवीर ने अपने प्यार का इजहार कर दिया, ध्वनि ने बड़े सम्मान के साथ बातो को घुमाया पर प्यार की शिक में अनपढ़ राजवीर को कुछ समझ नहीं आ रहा था। एक दिन ध्वनि ने राजवीर को घर पे बुलाया, राजवीर खूब खुश हो कर, बाजार से अच्छा परफ्यूम लेके, एक फूलो का गुलदस्ता, ब्लैक कलर का शर्ट पहन के उसके घर चला गया, ध्वनि के घर की बेल बजाई, ध्वनि ने दरवाजा खोला, राजवीर को अभी भी यकीन नही था की ध्वनि ने आज उसका प्यार कुबूल कर लिया, ध्वनि के लिविंग रूम में बैठे ही थे की, देखो राजवीर कहते ध्वनि ने सन्नाटे को थोड़ा, और राजवीर को कहते हुऐ, राजवीर समझ ये घर मेरी दुनिया है जहा तू आया है और मुझे भी पसंद है की तू मेरी दुनिया में आया है, वैसे ही काफी लोग हमारी दुनिया में आते है कुछ वक्त ठहरते है और कुछ पूरी जिंदगी साथ रहते है।
मेरी दुनिया के भी कही हिस्से है जहा कुछ पब्लिक तो कुछ प्राइवेट से किस्से है। दरवाजे के बाहर खड़े लोगो से तू मेरा खास है।पर मुझे कुछ चीजों के लिए मेरे पति से ही आस है।
तो राजवीर हमारा रिश्ता लीविंग रूम तक ही सीमित है। बेडरूम तक नहीं।
ये बात सुनकर मन ही मन में राजवीर थोड़ा दुखी हुए, और कहा मन ही मन में, अरे पगली मेरा तेरे से आत्मिक रिश्ता है और दैहिक रिश्ते के लिए क्या ये जग कम है। राजवीर कुछ ना बोला, और छगललाल बन ने चला गया।

