कसक
कसक
सोनाक्षी की पति से आज तक मेरी मुलाकात नहीं हुई थी। मैं चाहता था कि हम मिलें और हमारी बातचीत हो लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। दो साल गुजर गए, अब तो सोनाक्षी का पति कभी कभार ही अपने ससुराल आता है।
सोनाक्षी रिश्ते में मेरी बहन लगती थी और उसका घर मेरे घर के करीब था। उसका एक भाई था नीरज, जो उम्र में मुझसे छोटा था। कभी-कभी उससे मेरी लंबी बातचीत होती थी।
उन दिनों सोनाक्षी फर्स्ट ईयर में पढ़ती थी जब मैं अक्सर उसके घर जाता था और उससे बातचीत भी होती थी। उसकी मां एक बदमिजाज औरत थी। एक दिन मजाक में किसी ने उससे कह दिया कि मैं उसकी बेटी से शादी करना चाहता हूं, यह सुनकर उसी के सामने मेरी बहुत बुराई की।
एक दिन सोनाक्षी अपने भाई नीरज के साथ सड़क के किनारे खड़ी थी। मैं उधर से गुजर रहा था, "संतोष भाई, अच्छा हुआ आप मिल गए, मेरी बहन को आगे छोड़ दीजिए," नीरज ने मुझसे कहा। मैंने सोनाक्षी को अपनी बाइक पर बैठने के लिए कहा लेकिन वह अपनी जगह से टस से मस न हुई, ' जैसी मां वैसी बेटी,' सोचते हुए मैं आगे बढ़ गया।
इसी बीच कई साल गुजर गए। सोनाक्षी की शादी हुई तो उसके पति से मिलने की एक अजीब सी ख्वाहिश मेरे दिल में पैदा हो गई। शादी के पहले साल में दूल्हे का अपने ससुराल में आना जाना लगा रहता है। जब वह आता है तो घर में कितनी रौनक आ जाती है। हंसी के फूल बिखर कर पूरे घर को महका जाते हैं, उन्हीं अवसरों का मुझे सालों तक इंतजार है।
आजकल सोनाक्षी अपने पति के साथ कहीं बाहर रहती है। अब मुझे उसका पति से मिलने का मन नहीं करता।
