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Akaash ydv Dev

Crime Thriller


4.4  

Akaash ydv Dev

Crime Thriller


खौफ़...एक अनकही दास्ताँ-3

खौफ़...एक अनकही दास्ताँ-3

14 mins 325 14 mins 325

*"पार्ट-3"*


प्रिय पाठकजन...

कहानी के दोनों भाग को पढ़कर अपना प्यार देने के लिए आप सभी को धन्यवाद। अब तक आपने पढ़ा तीस वर्षीय खूबसूरत रईस नौजवान लड़का एक सड़क हादसे में अपने होश खो चुका है, उसका इलाज़ जिस हॉस्पिटल में हो रहा है, और पहली ही रात उसके देखभाल का जिम्मा जिस नर्स एलिना को दिया गया था उसी रात उसका खून किसीने बेरहमी से कर दिया। और तो और उसके लाश को भी एसिड में गलाकर ख़त्म भी कर दिया गया। फ़िर दूसरी सुबह उस होश खो चुके युवक के इलाज़ के लिए एक मनोचिकित्सक डॉक्टर डेनियल को बुलाया गया, जिसका दिमाग़ कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है। एलिना के मौत का पहला ही दिन बीत था और उसके क़ातिल ने अपने दूसरे शिकार के रूप में उसी हॉस्पिटल की रिसेप्शनिस्ट लिसा विलियम को भी चुन लिया। 

अब आगे.... :- 


रात के नौ बज चुके थे। डॉक्टर गोयंका अपने केबिन में डॉक्टर डेनियल के साथ मरीज के विषय में ही विचार विमर्श कर रहे थे।डॉक्टर गोयंका तो मरीज के विषय मे सोच रहे थे,लेकिन डॉक्टर डेनियल की आंखे डॉक्टर धीरज गोयंका पर ही केंद्रीत थी...वजह थी उनकी बौखलाहट और उनके माथे पर उभरी चिंता की बेहिसाब लकीरें। 


"अच्छा गोयंका साहब! आपने एक चीज पे गौर किया" ??

डॉक्टर डेनियल ने एक सीधा सा सवाल डॉक्टर गोयंका से किया था। 

क..क...क्या ??

डॉक्टर गोयंका एक फंसी हुई और बहुत ही मरी हुई सी आवाज़ में डॉक्टर डेनियल से पूछ बैठे। इस पर डॉक्टर डेनियल के होंठो पर एक बहुत ही रहस्यमयी मुस्कान तैर गई,पर उन्होंने तुरंत कहा कुछ नही। 


अपने कोट की जेब से ट्रिपल फाइव सिगरेट निकाल कर बड़े आराम से उसे अपने होंठो से लगाते हुए ,लाइटर जलाया, और फिर सिगरेट को जला कर दो कश लगाते हुए दीवार पर लगी घड़ी को एकटक निहारते रहे.......फिर अपने होंठो को गोल कर के धुएं के छल्लों को निकालते हुए बोले...

"मुझे कुछ गड़बड़ लग रहा है"

"क्या गड़बड़ लग रहा है डेनियल?"

सकपकाते हुए डॉक्टर गोयंका ने अपने जूनियर मित्र से पूछा।


और डॉक्टर डेनियल ने अपने सीनियर डॉक्टर के इस हालत का भरपूर मज़ा लेते हुए एक और बम छोड़ा। 


"यही की आपके दिमाग में आख़िर क्या चल रहा है...?"


इस बार तो डॉक्टर गोयंका की घिग्घी ही बंध गई,और लगभग मिमियाते हुए उन्होंने डॉक्टर डेनियल से पूछा "पहेलियां न बुझाओ डेनियल,साफ साफ बताओ तुम्हारे दिमाग मे क्या चल रहा है"??

"गोयंका साहब अब आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नही ,वो केस अब मै देख रहा हूँ"। 


वैसे मुझे आपकी नर्स एलिना से बात करनी पड़ेगी,क्योंकि वो कल रात उसके वार्ड में ही थी और उसने उसे रात में नींद के आगोश में ऐसा कुछ बड़बड़ाते हुए सुना है या नही सिर्फ यही जानना चाहता हूं,इससे हमारी प्रॉब्लम थोड़ी आसान होती दिख सकती है,अगर मरीज ने कुछ बड़बड़ाया हो तो....अगर एलिना ने कुछ सुना हो तो!!!


डॉक्टर डेनियल अपनी हर बात पर एक अलग ही प्रभाव डालते हुए डॉक्टर गोयंका से कह रहे थे....और हर बात के साथ ही बढ़ रहीं थी पसीने की वो बूंदे,जो डॉक्टर गोयंका के माथे लगातार चमकती जा रही थी ।

डॉक्टर साहब आप फौरन एलिना को यहां बुलाइए मैं उससे जानना चाहता हूं। 

अभी बुरी तरह बौखलाए डॉक्टर गोयंका कुछ कहने के लिए अपने होंठ खोलने ही वाले थे कि पास ही सेल्फ पर फाइलों को काफी देर से सज़ा रही मायरा बोल पड़ी,

"लेकिन डॉक्टर डेनियल ये कैसे सम्भव है"?

उसे तो बेहोशी का इंजेक्शन खुद एलिना ने ही लागाया था,तो फिर वो मरीज नींद में कैसे कुछ बड़बड़ा सकता है ??

अपनी बौखलाहट और एक अनजाने डर की वजह से गोयंका तो ये भूल ही गए थे कि मरीज तो सारी रात बेहोश पड़ा था,उसी सुई की वजह से।


इस बार डॉक्टर डेनियल की नज़रों से मायरा खुद को साफ बचा तो गई थी,लेकिन मायरा के नज़र चुराने के अंदाज़ को डॉक्टर डेनियल ने जिस अंदाज से नजरअंदाज किया था,वो मायरा महसूस नही कर पाई। 

और डॉक्टर धीरज गोयंका, उनका दिमाग़ तो जैसे आसमान में परवाज कर रहा था। 


ओके डॉक्टर साहब अब मुझे इजाजत दीजिये मैं कल फिर आऊंगा...आप मेरे मरीज की सारी। गतिविधियों पर नज़र रखियेगा....ऐसा कहते हुए वे मायरा पर एक सरसरी नज़र डालते हुए मुस्कुरा भर दिए। 


★★★


लिसा विलियम

एक मॉडर्न ख़्यालात की नौजवान लड़की,जिसे सिर्फ वर्तमान में जीना आता था,हर ऊंच नीच को ताक पर रख कर,वो सिर्फ अपने दिल और अपने जिस्म की सुनती थी। एक ऐसी खुले सोच की लड़की जो अपने जिस्मानी जरुरतों का अच्छे से ख़्याल रखती थी। 


अभी पिछले महीने ही उसकी मुलाकात एक बहुत ही रईस बाप के बिगड़े औलाद साहिल से हुई थी,जो बहुत जल्दी ही दोस्ती और फिर प्यार से होते हुए बेडरूम तक पहुंच चुकी थी।


आज रात भी हॉटेल कॉन्टिनेंटल में उनका मिलने का प्रोग्राम था,लेकिन लिसा ने अचानक ही जब अपनी ड्यूटी के बारे में उसे बताया तो वो बुरी तरह भड़क गया, और फिर मुँह फुलाते हुए बोला...मुझे कुछ नही मालूम, तुम और मैं आज मिल रहे मतलब मिल रहे,कैसे मुझे नही मालूम है। 


लिसा भी किये कराए पर यूँ पानी नही फेरना चाहती थी

इसीलिए बड़े ही शोखियों के साथ उसने साहिल से कहा

इतनी ही बेचैनी है तो आ जाओ तुम ही मेरे पास...ड्यूटी मेरी लगी है,तुम तो फ्री ही बैठे हो न।


इसके ठीक एक घँटे बाद लिसा का वो बॉयफ्रेंड उसी हॉस्पिटल में था...लेकिन वो मेन रास्ते से अस्पताल के अंदर दाखिल नही हुआ था। 

अस्पताल के पीछे से पाइप के सहारे वो दूसरी मंजिल के रोशनदान तक पहुंचा ,फिर खिड़कियों के सहारे वो अंदर आ गया....और अब वो दूसरी मंजिल के ऐसे कमरे में मौजूद था...उस कमरे में जिसमें घना अंधेरा छाया था....।।

उसने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और लिसा के नम्बर को डायल किया...तीसरे रिंग पर कॉल रिसीव किया था लिसा ने...फिर लगभग फुसफुसाते हुए पूछा "साहिल कहाँ हो तुम इस वक़्त और कितने बजे तक यहां पहुंचोगे??"


साहिल ने कहा ,"पहुंचोगे नही मेरी जान ,मैं बिल्डिंग के पिछले हिस्से में से पाइप के सहारे पहुंच चुका हूं, और दूसरे तल्ले के किसी कमरे में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ"।


लिसा बोली...."ओह गॉड तुम इंसान हो या बन्दर हो

कीधर से भी आ जाते हो,वो रास्ता सरीफों के आने का नही है"। इतना कह कर लीसा बोली,वहीं रुको मैं आती हूँ... वैसे किस कमरे में हो तुम ?

साहिल बोला "शायद तीसरा या चौथा होगा"।


"ओके मैं आती हूँ" इतना कह कर लिसा मोबाइल को हाथ मे लिए अपने रिशेप्शन वाले आफिस से लगे कमरे में से बाहर निकल कर दूसरी मंजिल में जाने के लिए सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई....लेकिन फोन चालू ही था, कॉल डिसकनेक्ट नही किया था लिसा ने। 

सीढ़ियों से वो एहतियात बरतते हुए गई थी,दबे पांव बढ़ती हुई वो दूसरी मंजिल पर पहुंच कर....वो किसी चालाक बिल्ली की तरह हर तरफ नज़र दौड़ाती काफ़ी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी...की अचानक से कमरे का दरवाजा खुला और लिसा को अंदर खिंच लिया गया....लिसा इस अचानक से हुए हरकत से थोड़ी सहम गई थी,लेकिन फिर भी उसने मुँह से एक भी शब्द न निकाला और चुप चाप खिंचने वाले कि बांहों में समा गई। 

दोनो ही एक दूसरे पर झपट से पड़े थे...एक दूसरे को नोच खसोट रहे थे।

और पूरे कमरे में उनकी सिसकियों की धीमी आवाज़ गूंज रही थी। 

साहिल ने पहले लिसा के पूरे बदन को सहलाना और चूमना शुरू किया,फिर एक एक कर उसके सारे कपड़े उसके जिस्म से अलग कर दिये....वासना की चरम सीमा पर थे दोनो....और दोनो ही कि आँखे बंद थी,पर हाथ और जुबान अपना काम कर रहे थे। 

लिसा के उभारों से खेलता साहिल नीचे उसकी पेट और नाभि को चूमता हुआ साहिल लिसा के टांगो के बीच जा ही रहा था कि अचानक रुक गया....उसे लगा की उस कमरे में और भी कोई है जो उनकी सिसकियों के साथ ही खुद भी जोर जोर से सांसे ले रहा है....बस इतना ही सोच पाया था साहिल,की उसे चमकती हुई सी दो बिल्लौरी आँखे बिल्कुल अपने करीब ही दिखीं....और फिर लोहे का मोटा सा सिरा साहिल के कनपट्टी पर पड़ा....ऐसा लगा सैकडों सूर्य की किरणें उसकी आँखों मे चमक गई,और वो बिना किसी प्रतिरोध के ही अचेत हो कर फर्श पर गिर गया। इस अचानक हुए हमले से लिसा एकदम स्तब्ध रह गई थी, उसे तो कुछ समझ ही नही आया हो क्या रहा है....और जब तक समझ मे आता....वो नकाबपोश दरिंदा लिसा को अपनी बांहों में भर कर अपने होंठो को उसके लबों से लगा चुका था...!!

लिसा अब पूरी तरह से उसकी जकड़ में थी,चाह कर भी खुद को हिला नही पा रही थी...और लिसा के होंठो पर तो उसके होंठो ने ताले पहले ही जड़ दिये थे ।

अब लिसा के स्तनों को बुरी तरह मसल रहा था वो दरिंदा....और साथ बढ़ रही थी लिसा की धड़कने भी,वासना की आग उसे पूरी तरह अपने आग़ोश में ले चुकी थी,और जब उस हैवान ने अपने हाथ लिसा के निर्वस्त्र जिस्म पर फिराते हुए उसके सबसे संवेदनशील अंग पर सहलाना शुरू किया तो, लिसा का पूरा बदन एक दम से अकड़ सा गया और वो भी उससे ऐसे लिपट गई जैसे कि कोई लता हो....अब दोनो ही एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो चुके थे....और अपनी यौवन की गरमी उतारने के लिए जितना हो सके एक दूसरे का सहयोग कर रहे थे ।

कभी लिसा ऊपर होती तो कभी वो हिंसक इंसान ।

और जब दोनों ही के जिस्मों का लावा एक साथ फुट पड़ा तो दोनो ही एक दूसरे को इतना कस कर जकड़ लिए ,मानो एक दूसरे की हड्डियां चटका डालेंगे ।

उस सन्नाटे में उन दोनों की सांसो का स्पष्ट आवाज़ गूंज रहा था उस कमरे में। 

दोनो ही अपने आप की सांसे दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे थे...पर इससे पहले की लिसा अपने उपर से उंस भरी भरकम सांड के से शरीर को हटा पाती... वो फिर से लिसा पर हावी होने लगा,उसके जिस्म को चूमने और सहलाने लगा....इसी के साथ लिसा भी फिर से खुद को तैयार करने लगी अगले राउंड के लिए..... साहिल को तो जैसे वो भूल ही चुकी थी।

दूसरी बार जब दोनो के वासना का तूफान थमा ,तो लिसा बुरी तरह थक चुकी थी और अपनी आंखों को बंद किये ही ज़ोर ज़ोर से सांसे ले रही थी.....तभी आचानक उसे अपनी गर्दन पर हाथों का दबाव महसूस हुआ...वो उठ कर उसे हटाना चाहती थी,लेकिन उसके गर्दन पर उन हाथों का दबाव लगातार बढ़ता ही जा रहा था....लिसा की आंखे अब उबलने लगीं थीं और मुँह से गुं गुं की आवाज़ें आ रही थी....बहुत ही खतरनाक लग रहा था वो खूनी दरिंदा....और फिर अचानक ही उसने लिसा के गरदन में उस दरिंदे ने अपने नुकीले दांत गड़ा दिए....और लिसा के खून का फव्वारा उस बेरहम इंसान के मुँह में फूट पड़ा। 

एक बार जिस क्रूरता से उसने लिसा को भंभोड़ना शुरू किया, तो उस पिशाच ने उसे तब तक नही छोड़ा जब तक कि लिसा की हालत भी एलिना की तरह न हो गई !!

लिसा के स्तनों को काट काट कर खाने के बाद उसने उसकी योनी को भी काट काट कर उसके जिस्म से अलग कर दिया और फिर अपने मुंह मे लगे लिसा के खून को पास ही पड़े लिसा के स्कर्ट से पोछ लिया

पास ही पड़े साहिल के शरीर बड़े ही नफरत से हिला डुला कर देखा,मगर उसके जिस्म में भी कोई हरकत नही हुई,निस्तेज पड़ा था साहिल भी। 

......और फिर बहुत ही कुटिलता के साथ मुस्कुराते हुए अंधेरे में ही कहीं गायब हो गया।


★★★


सुबह के करीब साढ़े तीन बजे

साहिल के सिर में बहुत तेज दर्द उठा और वो एकदम से उठ कर बैठ गया। उसे कुछ भी अच्छी तरह याद नही आ रहा था.... उसने अंधेरे में खुद की आंखों को पहले एडजस्ट किया...और जब खुद पर नज़र डाला तो पाया की वो तो पूर्णतः निर्वस्त्र है। 

फिर उसे याद आया कि वो तो लिसा के साथ था और फिर किसी बिल्लौरी आंखों वाले ने लोहे की किसी भारी वस्तु से उसके सिर पर हमला किया था...इसके बाद अचानक ही साहिल को एक झटका लगा था। लिसा कहाँ है इस वक़्त ...?

उसने अंधेरे में ही हाथों से अपने कपड़ों को ढूंढना शुरू किया...उसके जीन्स की जेब मे ही उसका मोबाइल फोन मिल गया। और जैसे ही उसने अपने मोबाइल की फ़्लैश लाइट की रौशनी में लिसा को देखा...उसके पैरों से ज़मीन ही खिसक गई ।

लिसा की विभत्स लाश ने साहिल को एक दम सदमे में ला दिया, वो पीछे की ओर खिसक गया और उसी दौरान गिर भी गया। जल्दी जल्दी से उसने अपने कपड़े ढूंढे और उन्हें पहन कर जिधर से आया था,उसी रास्ते नीचे उतर कर अपने घर लौट आया।

हालांकि वो बहुत ज्यादा घबराया हुआ था...और उसका पूरा जिस्म पसीने से तरबतर हो चुका था।


★★★

सुबह:- 

जैसे ही पुलिस की जीप अस्पताल के कम्पाउंड में आकर रुकी उसमें से इंस्पेक्टर कूदकर बाहर निकला और अपने कैप को अपने सिर पर पहनते हुए हॉस्पिटल की सीढ़ियों के तरफ लपका....उसके पीछे पीछे ही तमाम पुलिसकर्मी भी  

हॉस्पिटल के अंदर दाखिल हो गए ।


जिस कमरे में लिसा की लाश पाई गई थी वो अभी बाहर से बन्द था लेकिन...डॉक्टर गोयंका,मायरा और नंदिता के साथ साथ अस्पताल के सारे स्टाफ़ उस दरवाजे के बाहर ही खड़े थे।


इंस्पेक्टर के आते ही डॉक्टर गोयंका ने उनसे बड़े ही गमगीन आवाज़ में कहा, "आइए इंस्पेक्टर साहब"।


इंस्पेक्टर ने भी थोड़ी संवेदना दिखाते हुए बड़े ही नरम आवाज़ में पूछा "लाश कहाँ है?"

गोयंका ने कहा,"इसी कमरे के भीतर"।


इंस्पेक्टर ने एक हवलदार से दरवाजा खोलने को कहा।


सभी लोग बाहर ही रहे सिर्फ डॉक्टर गोयंका ही पुलिस वालों के साथ अंदर आये थे।


लिसा की लाश पर एक सफेद मारकीन डाल दिया गया था,जिसे इंस्पेक्टर ने अपने ही हाथों से हटाया।

बुरी तरह नोचा था दरिंदे ने उसे,ये उसकी लाश देख कर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता थ ।


अपना मोबाइल निकाल कर फॉरेंसिक टीम को सूचना देने के बाद, इंस्पेक्टर डॉक्टर गोयंका से मुखातिब हुए

गोयंका बड़े ही मरियल सी आवाज़ में बताने लगे।


"सुबह वार्ड बॉय कमरे की सफाई के लिए आया था....जैसे ही उसने दरवाजा खोला ,उसकी चीख ही निकल गई

और खून खून चिल्लाता हुआ नीचे की ओर भागा,पूरे अस्पताल में अफरातफरी मच गई। बुरी तरह डर गया था वो,फिर जब वो थोड़ा शांत हुआ तो बताया कि उपर वाले कमरे में लाश पड़ी है।

और फिर जब हम सभी यहां उपर आए,तो देखा सही में किसी ने हमारी रिशेप्शनिस्ट लिसा का बेरहमी से कत्ल कर दिया है।


इंस्पेक्टर ने फिर डॉक्टर गोयंका से पूछा...ऐसे कैसे हो सकता है की आपके इतने बड़े अस्पताल में कोई खूनी आता है ,और आपके स्टाफ का कत्ल कर के चला भी जाता है ?

क्या यहां सिक्युरिटी की व्यवस्था नही है ??


है इंस्पेक्टर साहब...हमारे अस्पताल में कुल मिलाकर 6 जवान हमेशा तैनात रहते हैं मेन गेट पर लेकिन उन्होंने किसी को भी बाहर से अन्दर आते या अंदर से बाहर जाते नही देखा ।


तब तक हवलदार पूरे कमरे को सील करने के बाद लिसा के मोबाइल फोन को एक लिफाफे में डाल कर इंस्पेक्टर को दिखाते हुए कहा :-

"सर ये फोन बरामद हुआ है,शायद ये मृतका का ही है" ।


इंस्पेक्टर ने उस लिफ़ाफ़े को अपने आंखों के सामने लाते हुए सबको दिखाया और पूछा "क्या ये फोन लिसा का ही है?"


"हां सर ,ये लिसा का ही फोन है" मायरा ने कहा था। 


इंस्पेक्टर ने हवलदार से कहा "दास सिक्युरिटी इंचार्ज को बुला कर लाओ"

हवलदार ने तुरंत इंस्पेक्टर के हुक्म को पूरा करने के लिए नीचे की ओर दौड़ लगाया ।


10 मिनट में ही फॉरेंसिक टीम भी आ गई ,और तमाम सबूतों ब्लड सेंपल और फुटमार्क्स को इकट्ठा करने लगी।


इतने में सिक्युरिटी इंचार्ज भी वहां आ गया था।

इंस्पेक्टर को देखते ही उसने एक ज़ोरदार सैल्यूट किया और फिर सिर झुका कर खड़ा हो गया। 


इंस्पेक्टर ने उससे सुरक्षा के बाबत पूछ ताछ किए और फिर थोड़ी बहुत डांट पीला कर उसे वापस भेज दिया। 

सारी कार्रवाई पूरी होने के बाद...पुलिस टीम लाश को जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए ले गए। 


बाहर रिपोर्ट्स की भीड़ लग चुकी थी। बचने की तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर गोयंका रिपोर्टरों के सवालों में फंस चुके थे। लिसा की लाश इस बड़े से हॉस्पिटल से निकलकर दूसरे हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम के लिए भेजी जा चुकी थी। 


रिपोर्टरों के सवालों से फुर्सत मिली तो ठीक इसी वक़्त डॉक्टर गोयंका,सीढ़ियों के पास खड़े हो कर अपने फोन पर किसी से फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे ।


★★★

एक घंटे बाद :- 

ग्रे कलर की एक चमचमाती हुई शानदार शेवरलेट कार हॉस्पिटल के कम्पाउंड में आकर रुकी। झटके से कार के आगे का दरवाजा खुला।बगुले सी सफेद वर्दी पहने ड्राइवर बाहर निकला और फिर उसने गाड़ी के पीछे वाला दरबाजा खोल दिया ।पहले एक कीमती छड़ी गाड़ी से बाहर निकलती नज़र आई,फिर उस पर झूलता हुआ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति। वह अधेड़ जरूर था पर उसके चेहरे पर एक तेज था,उसके हर एक अंग से दौलत की खुशबू टपकती सी महसूस हो रही थी। 

चेहरा लाल, सुर्ख था उसका...आंखों पर सुनहरी कमानी का सफ़ेद लैंस वाला चश्मा,बालों को शायद खिजाब से काला किया गया था। हालांकि चलने के लिए उसे सहारे की जरूरत नही थी, फिर भी सोने की मुठ वाली छड़ी को टेकता हुआ वो ऑफिस की तरफ बढ़ गया ।


मेन गेट पर तैनात सिक्युरिटी गार्ड ने एक जोरदार सैल्यूट ठोंका था उसे,पर उसके सैल्यूट को नजरअंदाज करता हुआ वो अपने हॉस्पिटल में प्रवेश कर गया ।


पांच मिंट बाद ही वो अपने शानदार एयरकंडीशनर ऑफिस में था....कोलकाता में इस सख्स को मिस्टर "हाफ़िज़ सईद रब्बानी" के नाम से जाना जाता था। वही रब्बानी जिसे एलिना के मौत के फ़ौरन बाद डॉक्टर गोयंका ने फ़ोन किया था, और बॉस कहकर संबोधित किया था। लेकिन एलिना के मौत को जीतने एहतियात से छुपाया गया था, उतनी ही कोशिश इस मौत को छुपाने के लिए क्यों नहीं किया गया...? क्या अब राज खुलने जरूरी हो गए थे...? क्या लिसा की मौत एलिना के मौत पर से भी पर्दा उठा देगी..? डॉक्टर गोयंका के पीछे बुरी तरह पड़ चुके डॉक्टर डेनियल अब आगे आख़िर क्या करने वाले हैं...?


और अपनी याददाश्त खो चुका वो नवयुवक क्या उतना मासूम और भोला हैं जैसा वो दिखता है....? पर सबसे बड़ा सवाल वो बिल्लोरी आँखों वाला नरपिशाच आखिर कौन है..? कहा छुपा है..? और ऐसी दर्दनाक मौत वो आख़िर क्यों दे रहा है इन खूबसूरत लड़कियों को ? 


                     क्रमशः


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