कातिल कौन
कातिल कौन
भाग 41
हीरेन दा अपनी जुल्फों को झटका देकर ऊपर की ओर करते हुए उनमें उंगलियां फिराते हुए कहने लगे
"योर ऑनर, हमें यह ध्यान रखना होगा कि समीर की लाश की जेब में अनुपमा का एप्पल वाला मोबाइल मिला था और उसी कमरे में राहुल का आधार कार्ड भी मिला था । यहां यह ध्यान देने की बात है मी लॉर्ड कि जब मंगल सिंह समीर का मोबाइल फोन लेने के लिए आया था तब उसकी जेब से कोई मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ था । यदि ऐसा था तो फिर उसकी लाश की जेब में अनुपमा जी का मोबाइल कैसे पहुंचा ? इससे पता चलता है कि थानेदार मंगल सिंह के जाने के बाद कोई व्यक्ति उस घर में घुसा था जिसने समीर की जेब में अनुपमा का मोबाइल डाला था । कौन हो सकता है वह आदमी ?
यदि हम यह मान लें कि वह आदमी वही चोर था जिसने अनुपमा जी का पर्स चोरी किया था जो बाद में राहुल के घर से बरामद हुआ था तो फिर यह प्रश्न उठता है कि उस चोर ने वह मोबाइल समीर की जेब में क्यों रखा ?
अब यदि यह माना जाये कि समीर को मारने वाला व्यक्ति राहुल ही था जिसका आधार कार्ड वहां से बरामद हुआ था और जिसके घर से अनुपमा का पर्स बरामद हुआ था तो हमें फिर यह भी मानना होगा कि राहुल एक आदतन चोर था । यदि हम इस थ्यौरी को मानें कि वह आदमी राहुल ही था और वह आदतन चोर था तो फिर हम क्या यह समझें कि उस दिन यानि कि 31 मई की रात को अनुपमा के मकान में राहुल चोरी करने आया था ? यदि हम यह मान भी लेते हैं कै राहुल उस मकान में चोरी करने आया था तो फिर उसके साथ वह लड़की कौन थी जिसके साथ उस रात बर्थ डे मनाने के लिए राहुल ने संभोग किया था ? उस घर में किसी का बर्थ डे मनाने के लिए एस एस टी बेकरी से एक पाइन एप्पल फ्लेवर वाला केक भी मंगवाया गया था । बर्थ डे या तो राहुल का हो सकता था या फिर उसकी पत्नी या गर्लफ्रेंड का हो सकता था ।
यहां पर हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केक डिलीवर मैन ने अपने बयानों में बताया था कि उसने जिस व्यक्ति को केक दिया था उसके दाढ़ी मूंछें थीं । राहुल के किसी भी फोटोग्राफ में दाढी मूंछें नहीं हैं और राहुल की पत्नी रीमा ने भी अपने बयानों में कहा था कि राहुल दाढ़ी मूंछें नहीं रखता था । उसे पाइन एप्पल फ्लेवर वाला केक भी पसंद नहीं था । इसके अलावा एक बात और है योर ऑनर कि यदि उसे राहुल मान भी लिया जाये तो फिर वह खुद के द्वारा चोरी किया गया अनुपमा का मोबाइल समीर की जेब में क्यों रखेगा ?
अब हम छज्जू पनवाड़ी के बयानों पर आते हैं । उसने कहा था कि राहुल एक "कॉल ब्वाय" था और उससे पान लेकर जाता था । पुलिस और सरकारी वकील साहब का कहना है कि राहुल एक सुपारी किलर था । इस प्रकार राहुल का रहस्य अभी तक खुला नहीं है । पर एक बात तो तय है कि राहुल सुपारी किलर तो नहीं ही था क्योंकि उसके खिलाफ किसी भी थाने में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है ।
राहुल के बारे में मेरा मानना है कि उस रात अनुपमा के घर में बर्थ डे मनाने वाला व्यक्ति राहुल नहीं था बल्कि कोई और ही था । यदि हम उसे राहुल मानते हैं तो फिर हमें यह भी मानना होगा कि उसके साथ जो लडकी थी वह रीमा ही थी । उसके दस्तावेजों में उसकी जन्म तिथि 1 जुलाई लिखी हुई है जबकि वह दिन 31 मई का दिन था । इस प्रकार उस दिन राहुल का बर्थ डे नहीं था और रीमा का बर्थ डे तो 25 अगस्त को आता है । फिर एक बात यह भी है कि राहुल अपना या रीमा का जन्म दिन अनुपमा के घर में क्यों मनायेगा ?
यदि हम इस थ्यौरी पर काम करते हैं कि राहुल एक "कॉल ब्वाय" था तो हमें यह भी सोचना होगा कि क्या उसे वहां अनुपमा ने बुलाया था ? यह पहले ही सिद्ध हो चुका है कि अनुपमा उस रात चंडीगढ में अपनी मां मालती देवी के पास थी तो फिर वह राहुल को कैसे बुला सकती थी ? अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि वह राहुल ही था तो फिर उसके साथ उस रात उस घर में कौन सी लड़की थी जिसने अपना जन्म दिन राहुल के साथ मनाया था ? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जन्म दिन किसी "खास अपने" के साथ ही मनाया जाता है, किसी भाड़े के "कॉल ब्वाय" के साथ नहीं । तो क्या वह लड़की राहुल की कोई गर्लफ्रेंड थीं ? ऐसे न जाने कितने प्रश्न हैं मी लॉर्ड जिनके अभी मेरे पास कोई जवाब नहीं हैं । पर मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि भविष्य में हमें इन प्रश्नों के उत्तर धीरे धीरे मिलते चले जायेंगे ।
अब हम अपना ध्यान राहुल से हटाकर किसी और पर केन्द्रित करते हैं । यदि हम ये मान लें कि उस रात बर्थ डे मनाने वाला व्यक्ति राहुल नहीं था तो फिर उसका आधार कार्ड वहां पर कैसे आया ? यह भी हो सकता है योर ऑनर कि जिस चोर ने अनुपमा का पर्स चोरी किया था उसी ने राहुल का पर्स भी चोरी कर लिया हो और आधार कार्ड यहां डाल दिया हो या गिर गया हो ? कोई जानबूझकर तो सबूत छोड़कर जायेगा नहीं , तो हो सकता है कि उसका आधार कार्ड वहां गिर पड़ा हो ?
हीरेन की इन दलीलों से सबका माथा चकरा गया था । हीरेन ने इस केस को जलेबी की तरह घुमा दिया था । सबके मन में एक ही जिज्ञासा थी कि आखिर कातिल है कौन ? हीरेन इस प्रश्न का सीधे उत्तर न देकर अपनी दलीलों को चकरघिन्नी की तरह गोल गोल घुमा रहा था । उसकी इस "पजल" से जज साहब का माथा भी भन्ना गया था इसलिए वे झल्लाकर बोले
"पहेलियां मत बुझाओ जासूस महोदय, कातिल का नाम बताओ । हमें तो अब सिर्फ कातिल का नाम चाहिए और कुछ नहीं । आप तो स्पष्ट करें कि समीर को किसने और क्यों मारा ? इंतजार करते करते थक गए हैं अब । अब तो आपके शरबती और दूसरे किसिम के पान भी बेअसर होने लगे हैं । इसलिए फटाफट इस कत्ल के रहस्य से पर्दा उठाइये" । जज साहब की बेचैनी देखने लायक थी ।
जज साहब की झल्लाहट देखकर हीरेन ने मीना से कहा
"अरे मीना, जरा वो बर्फ वाला पान निकाल कर देना । जज साहब को इस समय इस पान की बेहद सख्त जरूरत है" ।
मीना ने पानदान से एक बर्फ वाला पान निकाला और उसे हीरेन को दे दिया । हीरेन ने उस पान को जज साहब को देते हुए कहा "योर ऑनर, यह पान बर्फ की तरह से एकदम ठंडा होता है और यह पान इसे खाने वाले व्यक्ति को एकदम से ठंडा कर देता है । आप यह पान खाइये और दिल्ली में ही काश्मीर का सा आनंद लीजिए" । हीरेन ने एक बर्फीली मुस्कान का गोला जज साहब की ओर उछालते हुए कहा ।
जज साहब ने वह बर्फ वाला पान मुंह में रखकर कहा "जासूस महोदय , मेहरबानी करके इस केस को अब ज्यादा लंबा मत खींचना । हमारी इतनी सी बात मान कर लाज रख लेना" । जज साहब हाथ जोड़कर बोले ।
जज साहब को इस मुद्रा में देखकर हीरेन मन ही मन हंसा । एक वकील ही तो होता है जो जजों से भी हाथ जुड़वा लेता है वरना तो ये जज लोग न तो प्रधानमंत्री को मानते हैं और न ही राष्ट्रपति को । हीरेन भी जल्दी से जल्दी इस केस का क्लाइमेक्स खत्म करना चाहता था । इसलिए वह कहने लगा ।
"योर ऑनर, जिसने समीर का कत्ल किया है वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं हो सकता है । समीर एक कुख्यात सुपारी किलर था । उसने न जाने कितने लोगों को मारा था । मरने वालों में नेता, अधिकारी, अपराधी सभी प्रकार के आदमी होंगे । अपराधियों को मारना आसान काम नहीं होता है । इसलिए समीर को मारना भी आसान काम नहीं था । पर यह बात ध्यान रखने की है योर ऑनर कि समीर को मारना उसका उद्देश्य नहीं था । समीर का कत्ल एक दुर्घटना मात्र है क्योंकि समीर वहां गया ही किसी को मारने के लिए था । यदि कातिल समीर को नहीं मारता तो समीर उसे मार देता । इसलिए समीर का कत्ल कातिल ने आत्म रक्षा के लिए किया था ।
मेरे कहने का मतलब है कि समीर का कातिल भी कोई साधारण आदमी न होकर एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति ही होगा, इसकी संभावना बहुत अधिक है । वह व्यक्ति कौन हो सकता है और वह अनुपमा के घर में क्या कर रहा था ? यह प्रश्न बहुत जायज है ।
अब तक की बहस से यह तो पता चल ही चुका है मी लॉर्ड कि घर की चाबी सक्षम, अनुपमा और अक्षत के पास रहती थी । थानेदार मंगल सिंह ने उसकी एक डुप्लीकेट चाबी भी बनवा रखी थी । पर हम सब लोग यह बात बात भूल गये हैं कि उसकी एक चाबी कामवाली बाई कान्ता के पास भी रहती थी । अनुपमा और सक्षम ने अपने बयानों में कहा है योर ऑनर कि घर की एक चाबी कान्ता को दे रखी थी । अनुपमा अपने एन जी ओ के कारण अक्सर बाहर रहती थी और सक्षम ऑफिस चला जाता था । पीछे से कामवाली बाई आती और घर का सारा काम करके चली जाती थी । कान्ता के पास यह विकल्प सदैव था कि वह जब चाहे तब बेरोकटोक अनुपमा के घर में आ जा सकती थी ।
कान्ता का पति राम किशन एक सोसाइटी "आनंदम" में गार्ड का काम करता है । दोनों की शादी को सात आठ साल हो गए हैं मगर अभी तक दोनों के कोई बच्चा नहीं हुआ है । कान्ता अनुपमा के घर के अलावा एक और घर में काम करती है । इस तरह से उनकी गृहस्थ रूपी गाड़ी चल रही है । इस केस में कान्ता एक अहम किरदार है मी लॉर्ड, जिसे हम भूल गये थे । बस वही इस उलझे हुए ताले की चाबी लगती है मुझे" । इतना कहकर हीरेन के अधरों पर एक रहस्यमई मुस्कान खेलने लगी ।
श्री हरि
