हफ्ता वसूली भाग 26
हफ्ता वसूली भाग 26
कमल के पिता हरि सिंह जी कमल की ओर देखते हैं फिर जमील से पूछते हैं, "तुम मजाक कर रहे हों या सच बोल रहे हो ?"
जमील बोलता है, " बाबू अपुन तो सच बोलता इन लोगो के जैसे मुंह नहीं छिपाता हूं,
कमल कहता है " क्या भाई मरवाने पे तुले हो, थोड़ा तो समझने का।"
हरि सिंह उसका कान पकड़ कर खींचते हुए कहते हैं " नालायक उसे समझा रहा है तो अपने बाप को क्यों नहीं समझाता है, अगर तूने कोई देख रखी है तो बता उसी से करा देंगे तेरी शादी, तुझे जिंदगी गुजारनी है, हम तो तेरे साथ ही गुजार लेंगे।"
कमला यह सुन चिल्ला कर कहती हैं " अरे वाह भईया तो छुपे रुस्तम निकले मुझे भी नहीं बताया, उसका फोटो वोटो है, क्या नाम है उसका क्या करती है।"
जमील कहता है" मीना नाम है, ये थकेला नही बताएगा, फट्टू है, नौकरी करती है, एक बड़े ऑफिस में पर शादी के बाद छोड़ देगी।"
कमल कहता है " कमाल है भाई,! तुम तो शादी तक पहुंच गए,अभी तो ढंग से बात भी नहीं हुई।"
उसकी मां आते हुए पूछती है," क्या खाओगे तुम दोनों ?"
जमील बोलता है," मां तेरे हाथ का बना सब अच्छा लगता है, जो भी खिला दे खा लेंगे।"
रात में खेत के किनारे खटिया डाले कमल और जमील सोए हुए हैं, पर कमल की आंखों से नींद गायब है, उसके सामने तो मीना का चेहरा घूम रहा है, वह उसे सच में बहुत चाहने लगा था, पर वह चाहती है की नहीं यह उसे पता नहीं था, बार में काम करने वाली लड़कियां सभी ग्राहक के साथ एक जैसा व्यवहार करती है यह तो पता चल गया था, पर उसके मन में क्या है यह नहीं पता था, और इस बात का भी डर था की घर वालों को अगर पता चल गया की वह बार में नाचती है तो वह उसे भी घर से निकाल देंगे, हम भारतीयों की यही खासियत है, कि उनके पास कितना भी पैसा आ जाए, कितने भी बड़े आदमी बन जाए पर घर परिवार उनके लिए सर्वोपरि रहता है, कमल के पास इतना पैसा आ गया था कि वह जो चाहे कर सकता है फिर भी पिता जी के सामने वह घबराता है, यही संस्कार आज हमारे भारत देश को सभी देशों में अग्रणी रखा है, कमल सोचते सोचते सो जाता है।
सुबह बैलों के गले कि घंटी बजने से उनकी नींद खुलती है, खेत में बैल चल रहे थे, वैसे तो अब लोग ट्रैक्टर से खेती करते हैं पर कई लोग अभी भी बैलों का ही उपयोग करता है, "!!
सूरज देव अपनी तपिश बढ़ा चुके थे, स्कूल जाने वाले बच्चे अपनी मस्ती करते हुए बैग और झोला लादे स्कूल कि ओर जा रहे थे, जमील को यह सब बहुत अच्छा लगता है, विशेष कर औरतें जो गाना गाते हुए खेतों में काम कर रही थी, वह उसे बहुत ही अच्छा लगता है, वह तो अभी तक शहरों की चका चौंध ही देखता रहा था, पर पहली बार वह गांव की सादगी में आया था, वैसे कमल के साथ रहते हुए, उसकी भी भाषा में काफी सुधार होने लगा था, कमल ने रास्ते में ही उसे समझा दिया था कि गांवों में तू तड़ाक से बात करने पर लड़ाई हो जाती है तो वह बहुत सम्हाल कर बात करने लगा था !!
तभी कमला स्कूल कि ओर जाते जाते कहती हैं," भईया लोग जल्दी जाओ मां नाश्ता बना कर इंतजार कर रही है, अभी तक तो तुम दोनों मुंह भी नहीं धोए हो अलसी कहीं के।" जमील और कमल उसे देखते है तो वह मुंह चिढ़ा कर भागती है, दोनों हंसते है, जमील को यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही प्यारा लगता है।"
दोनों फ्रेश होकर नाश्ता कर रहे हैं, नाश्ता क्या कहेंगे एक तरह से खाना ही का रहे थे, उसी समय कमल का फोन बजता है, वह देखता है, दरोगा यादव का फोन था वह जमील को देता है, जमील फोन उठा कर बात करता है " पाय लागू दरोगा साहब, आइए नाश्ता करने।" यादव कहता है," अरे तुम दोनों आ जाओ नाश्ता मैं करवा दूंगा जल्दी आओ।"
दोनों तैयार होते है ,तभी बंशी अपनी गाड़ी लेकर आता है और कहता है" कमल भईया का हुआ दरोगा साहब से कुछो बात हुई ?"
कमल कहता है," वहीं जा रहे हैं।"
वह कहता है " आइए मैं थाने के पास तक छोड़ देता हूं, आइए चलते हैं।"
दोनों उसकी जीप में बैठते हैं !
थाने से करीब पांच सौ गज पहले ही बंशी दोनों को उतार देता है और कहता है" अब यहां से थोड़ा चहल कदमी कर लो, नहीं तो ऊ साला दरोगा देखेगा तो जल भुन जायेगा, आप लोग किसी तरह उस बकलौल को समझा लो मैं यहीं हूं जो भी कहेगा हम तुरंत दे देंगे "!
दोनों थाने पहुंचते हैं, और सीधे दरोगा के केबिन में जाते हैं, दरोगा के साथ कोई बैठा था, दरोगा इनको देख इस आदमी से कहते हैं," भाई आप जाइए आपका काम आपको बता दिया है, वो पूरा करो मैं एक और अर्जेंट मीटिंग कर लेता हूं।"!
वह उठ कर जाता है, दरोगा उन्हें आने का इशारा करते हुए कहता है," आओ मुंबईया बाबू बैठो।" दोनों बैठते हैं" वह पूछता है" क्या लोगे समोसा कचोरी कुछ मंगाए"? कमल कहता है " साहब पेट पूजा करके आए है, आप बस आदेश दीजिए क्या करना है।"
यादव कहता है" कितना पैसा देगा वो हराम खोर बंशी।"
दोनों एक दूसरे को देखते हैं फिर दरोगा की ओर देखते हैं।"
क्रमशः
