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Manoranjan Tiwari

Fantasy

2.5  

Manoranjan Tiwari

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एहसास

एहसास

8 mins
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एक रात जब मैं घर पहुँचा, तो मेरी पत्नी ने मेरे लिए खाना परोसा, मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा की मुझे, तुमसे कुछ बात करनी है। वह बैठ गई और चुप-चाप खाना खाने लगी। लेकिन मुझे उसके चेहरे पर दर्द की कुछ झलक दिखी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मैं उससे कैसे कहूँ की मुझे, तुमसे तलाक चाहिए। लेकिन मुझे तो कहना ही था, मैंने ठंडे दिमाग से बात शुरू की और अपनी इच्छा बता दी, उसके चेहरे पर कोई नाराज़गी के भाव तो नहीं आए, मगर उसने वैसे ही शांतचित रहते हुए पूछा क्यों?

मैंने उसके प्रश्न को कोई तवज्जो नहीं दिया, इस पर वह भड़क उठी और वहाँ पड़े बर्तन को उठा कर मेरी तरफ दे मारा और बड़बड़ाते हुए बोली "तुम मर्द नहीं हो"

उस रात हम दोनों में कोई बात नहीं हुई, वह बिस्तर पर रोती रही, मैं जानता था कि वह जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या है, मगर मैं कोई सही कारण बता सकने में असमर्थ था। वास्तव में कारण यह था कि मैं किसी और स्त्री से प्रेम करने लगा था, और मेरे दिल में मेरी पत्नी के लिए कोई जगह नहीं बची थी। मैं सिर्फ उसे बेवकूफ़ बना रहा था।

अगले दिन अपराधबोध महसुस भी मैंने तलाक के कागज़ात तैयार करवा दिया। जिसमें मैंने अपनी पत्नी को अपना ये घर, कार और मेरी कंपनी में ३०% का शेयर दिया। मगर जब मैंने उस कागज़ात को अपनी पत्नी से दिखाया तो उसने उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए और बिल्कुल अजनबी की तरह खड़ी रह कर रोती रही। मैं जानता था, इस औरत ने मुझे अपने दस साल दिये, अपना समय, सम्पदा और ऊर्जा सब कुछ दिया। मगर उसके इस बर्बाद हुए समय को तो मैं लौटा नहीं सकता था और मैं अपनी महिला मित्र से बहुत गहरा प्रेम करने लगा था। मैं जनता था उसके आँसू एक तरह से मुझे आज़ाद कर रहे थे, उस उलझनों से जिससे मैं पिछले कई सप्ताह से उलझा हुआ था। उसके आँसू ने मेरे तलाक के विचार को स्पष्ट और पुख़्ता कर दिया था।

अगले रात को मैं बहुत देर से घर आया, और बहुत थके होने के कारण सीधे बिस्तर में चला गया। मैंने देखा की मेरी पत्नी टेबल पर बैठ कर कुछ लिख रही है। मगर मैंने उसके तरफ ध्यान नहीं दिया और सो गया।

काफ़ी रात गुजरने के बाद मेरी नींद खुली तो देखा वह अभी भी टेबल पर बैठ कर लिख रही है। मैं अपना चेहरा दूसरी तरफ कर फिर से सो गया।

अगली सुबह वह अपने तलाक के शर्तों के साथ मेरे सामने प्रस्तुत हुई। उसने उसमें लिखा था कि उसे मुझसे कुछ भी नहीं चाहिए। लेकिन एक महीने का नोटिस चाहिए और इस एक महीने में हम दोनों बिल्कुल सामान्य बने रहने की कोशिश करेंगे। ऐसा करने के पीछे उसका कारण यह था की हमारे बेटे की परीक्षा अगले एक महीने में संपन्न होने वाली थी और वह नहीं चाहती थी कि हमारे टूटे हुए रिश्ते का कोई असर मेरे बेटे पर हो। ये तो बहुत अच्छी बात थी। मैंने उसकी ये शर्त स्वीकार कर ली। लेकिन उसकी कुछ और भी शर्त थी। उनमें से एक था कि "जिस तरह मैं, उसे शादी के दिन अपने बाँहों में लिए हुए, बाहर से अंदर और फिर सोने के कमरे में ले गया था" ठीक उसी तरह अगले एक महीने तक मुझे उसे वैसे ही बाँहों में लेकर अंदर कमरे से बाहर बैठक तक और फिर घर के बाहर तक छोड़ना था। ये शर्त सुन कर पहले तो मुझे लगा की यह पागल हो गई है, मगर किसी तरह एक महीना तक मैनेज करने के लिए मैं राज़ी हो गया।

जब मैंने अपनी पत्नी के तलाक के शर्तों को अपनी महिला मित्र को बताया तो वह ठहाका लगा कर हँसने लगी और कहा कि वह अब कुछ भी ट्रिक कर ले लेकिन उसका तलाक तो अब हो ही जायेगा।

मेरा, अपनी पत्नी के साथ काफी अर्से से कोई शारीरिक संपर्क नहीं था। अगली सुबह जब मुझे, अपनी बाँहों में लेकर बाहर जाना पड़ा तो हम दोनों को बहुत संकोच हुआ। मेरा बेटा, हमारे पिछे से खड़ा होकर हँसता हुआ ताली बजा रहा था ये सोच कर कि पापा, माँ को बाँहों में लेकर चल रहे है। ये सोच कर मुझे बहुत तकलीफ़ हुई। मेरी पत्नी ने बहुत प्यार से मुझे कहा कि हमारे टूटे हुए रिश्ते के बारे में मैं अपने बेटे को ना बताऊँ। मैंने उसे दरवाज़े के बाहर छोड़ दिया। वहाँ से वह अपने ऑफिस के लिए चली गई और मैं अपनी गाड़ी लेकर ऑफिस चला गया।

दूसरे दिन जब मैंने, अपनी पत्नी को बाँहों में लेकर बाहर जाने लगा तो मुझे उसके ब्लाउज़ से खुशबू आई और मुझे महसूस हुआ की एक लम्बे समय से मैं इस स्त्री के ऊपर ध्यान ही नहीं दे रहा था। वह अब जवान नहीं रह गई थी, कुछ झुर्रियों जैसे निशान और सफ़ेद बाल दिखने लगे थे उसके। उसने मेरे लिए जो अपने दस साल दिए, उसके लिए मुझे दुःख हुआ।

चौथे दिन मुझे महसूस हुआ की हमारे बीच अपनापन और नज़दिकी वापस आने लगी है। लेकिन मैंने कुछ भी नहीं कहा और उसे दरवाज़े के बाहर छोड़ कर ऑफिस के लिए निकल गया।

इसी तरह हर रोज़ यह क्रिया हम करते रहे। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि वह दिन-प्रतिदिन कमज़ोर और हल्की होते जा रही है। जबकी इस लगातार व्यायाम से मैं ताकतवर होते जा रहा था।

एक सुबह मेरी पत्नी ने पहनने के लिए ड्रेस चुनने को कहा, वह एक-एक ड्रेस को पहन कर देखती थी। मगर उसके कमज़ोर और दुबली-पतली होने के कारण उसी के ड्रेस उसे फिट नहीं हो रहे थे। मैं यह सोच कर बहुत व्यथित हुआ कि मेरी पत्नी ने अपने दर्द और तकलीफों को इस कदर अपने अंदर छुपा लिया है कि इसका असर उसके सेहत पर हो रहा है। वह हर रोज़ दुबली और हल्की होते जा रही है। तभी तो मैं उसे आसानी से उठा पाता हूँ। तभी मेरा बेटा आकर बोला "पापा, मम्मी को बाँहों में उठा कर बाहर छोड़ने का समय हो गया। मेरी पत्नी ने बेटे के तरफ प्यार से देखा और अपने पास बुला कर अपने बाँहों में ले लिया। मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया, क्योंकि मुझे महसूस हुआ कि इस क्षण मैं इतना कमज़ोर हो रहा था कि शायद अपना फ़ैसला बदल देता।

आख़री दिन जब मैं अपनी पत्नी को बाँहों में लेकर चला तो मेरे पैर ही नहीं उठ रहे थे, मुझे उस दिन उसका इतना हल्का होना। मुझे इस कदर दुःखी कर दिया की मेरे आँसू बहने लगे। मैंने उसे और ज़ोर से अपनी बाँहों में पकड़ते हुए सिर्फ इतना कहा "मुझे अब समझ आ रहा है की, हमारे रिश्ते में नज़दीकी की बहुत कमी हो गई थी''। फिर मैंने उसे दरवाज़े के बाहर छोड़ कर तेज़ी से अपनी गाड़ी लेकर निकल गया। मैं बहुत तेज़ जा रहा था, ऐसा लग रहा था की कहीं देर न हो जाए।

मैं लगभग दौड़ते हुए अपनी महिला मित्र के घर गया और जाते ही कहा। मुझे माफ़ कर दो, मैं अपनी पत्नी से तलाक नहीं ले सकता। मेरी महिला मित्र ने थोड़ा चिंतित होकर मेरे ललाट पर हाथ रखते हुए बोली "तुम्हे बुख़ार तो नहीं न आ रहा? क्या तुम ठीक हो?''

मगर मैंने उसके हाथ को दूर हटा कर कहा, हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ अब, लेकिन मैं अपनी पत्नी से तलाक नहीं लेना चाहता और ये मेरा फ़ैसला है। क्योंकि मुझे अब समझ में आ गया है कि मैं अपनी पत्नी से इसलिए तलाक नहीं रहा था। क्योंकि मैं उससे प्यार नहीं करता, बल्कि इसलिए तलाक ले रहा था क्योंकि हम दोनों ने एक-दूसरे के बारे में छोटी-छोटी बातों को देखना भूल गए थे। मैं अभी भी अपनी पत्नी से ही प्यार करता हूँ। तुमसे सिर्फ मेरा शारीरिक आकर्षण है जो प्यार जैसा लग रहा है। यह सुन कर मेरी महिला मित्र ने मुझे एक ज़ोर का थप्पड़ मारा और रोते हुए मुझे बाहर निकाल कर मेरे मुँह पर धड़ाम से दरवाज़ा बंद कर दिया।

मैं दौड़ते हुए फूल और बुके की दुकान पर गया और अपनी पत्नी के लिए खूबसूरत फूलों का एक बुके बनाने को कहा। वहाँ खड़ी सेल्स गर्ल ने पुछा की इस पर क्या लिखना है सर? तो मैंने अपनी पत्नी को सम्बोधित करते हुए लिखा "मैं तुम्हे हर सुबह इसी तरह बाँहों में लेकर बाहर छोडूगा जब तक की मौत हम दोनों को अलग ना कर दे"।

उस सायं को जब मैं घर पहुँचा तो हाथों में फूलों के ग़ुलदस्ता लिए, चेहरे पर मुस्कुराहट लिए दौड़ते हुए सीढ़ियाँ चढ़ कर बैडरूम में गया तो देखा मेरी पत्नी वहाँ मरी पड़ी है। मेरी पत्नी को कैंसर आखरी स्टेज पर था और मैं अपनी महिला मित्र के साथ इस कदर मौज़-मस्ती में उलझा रहा कि अपनी पत्नी के ख़राब होते सेहत पर ध्यान भी ना दे सका। मेरी पत्नी जानती थी कि वह सिर्फ कुछ दिनों तक जीवित रहने वाली है। इसीलिए उसने मेरे साथ तलाक का इस तरह का शर्त रखी थी। जिससे हमारे बेटे को लगे की हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है। वह चाहती थी की उसके मौत के बाद मेरा बेटा एक अच्छा पति और पिता के रूप में जाने ना की कोई नकारात्मक बात उसके मन में आए।

हमारे जीवन में धन-सम्पति, कार, बंगला ये सब जीवन को आसान तो बना देते है, मगर एक खुशहाल जीवन नहीं बना सकते, खुशहाल जीवन के लिए हम सबको एक-दूसरे के छोटी-छोटी बातों, छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखना चाहिए।

 


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