भक्ति के साथ प्रगति की रक्षा
भक्ति के साथ प्रगति की रक्षा
🌿 शिव जी को बेलपत्र अर्पित करने का एक नया तरीका 🌿
सावन का महीना आया। हर घर में भोलेनाथ की पूजा होने लगी। कोई 51 बेलपत्र चढ़ा रहा है, कोई 108, कोई 1000 और कोई उससे भी अधिक।
लेकिन एक दिन मैंने उन बेल के पेड़ों को देखा, जो कभी हरे-भरे हुआ करते थे। उनकी शाखाएँ सूनी और पत्ते कम होते जा रहे थे।
तभी मन में एक सवाल आया—
क्या हम भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाते-चढ़ाते बेल के पेड़ों को ही कम तो नहीं कर रहे हैं?
और पूजा के बाद वही बेलपत्र नदियों और तालाबों में बहा दिए जाते हैं, जिससे जल भी प्रदूषित होता है।
मैं यह नहीं कहती कि भोलेनाथ को बेलपत्र मत चढ़ाइए।
भक्ति जरूर कीजिए, लेकिन भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा भी कीजिए।
इस सावन आइए, हम 108 बेलपत्र चढ़ाने के साथ 108 बेल के पौधे लगाने का संकल्प लें।
हर घर एक बेल का पौधा लगाए, हर मंदिर एक बेल का पेड़ लगाए।
क्योंकि शिव केवल मंदिर में नहीं, प्रकृति में भी हैं।
🌿 एक बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाइए और एक बेल का पौधा धरती पर लगाइए।
यही होगी हमारी भक्ति, यही होगी प्रकृति के प्रति सच्ची श्रद्धा।
— लेखिका: प्रियंका जायसवाल
