Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!
Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!

Dlhs Interschool

Tragedy

3  

Dlhs Interschool

Tragedy

बेटी की आस

बेटी की आस

3 mins
158


जब मैं मां के गर्भ में थी तो सोचती थी कि मां के पेट से कब बाहर आऊंगी पापा की गोद में खेलूंगी भैया की तरह पापा के कंधे पर बैठकर मेला देखने जाऊंगा दादी की लोरी सुनूंगी और सो आऊंगी। जब मैं मां के पेट से बाहर आई तो सब कुछ बदल चुका था। मेरे रोने की आवाज के सिवा चारों तरफ सन्नाटा था मैं मां के बगल में लिखी दादी ने मुंह मोड़ कर मुझे कुलक्षण। पापा मां को ताने देने लगे मैं फिर भी खुश थी की माँ पापा की तरह कंधे पर बैठाकर घुमाती ।रात को दादी की तरह लोरी सुना कर मुझे सुला देती है। मैं फिर भी खुश जब मैं 5 वर्ष की हो तो मैंने पापा से कहा पापा मुझे भी स्कूल जाना है भैया की तरह पढ कुछ बनना है। पापा ने कहा बेटियां पढ़ती नहीं है मां के साथ घर के काम में हाथ बटाती हैं। मैं फिर भी खुश थी क्योंकि मैंने सोचा भैया की किताबों से पढ़ लूंगी दादी मुझे काम में लगा लेती मैं फिर भी खुश थी क्योंकि रात को मां मुझे पढ़ाती लेकिन मैं घर के कामों से इतना थक जाती कि रात को आधी पढ़ाई कर के ही सो जाती। मैंने घर पर ही रह कर बहुत कुछ सीख लिया था दिल में कुछ अरमान दफन थे मैं फिर भी खुश थी पापा को मैं एक आंख नहीं भाती थी। दादी मुझे भैया के पास जाने तक नहीं देती थी ।मैं फिर भी खुश थी मेरी उम्र 17 वर्ष की हो चुकी थी दादी पापा से जिद करने लगी कि इसकी शादी की उम्र हो गई है जल्दी से इसकी शादी कर दो। पापा ने मेरी शादी के लिए लड़का देख लिया मुझे यह भी नहीं पता था कि लड़का कौन है और कैसा है 3 महीने बाद मेरी शादी थी। मैं फिर भी खुश थी पापा मेरी शादी की तैयारी में जुट गए मैंने मां से पूछा मां पापा क्या कर रहे हैं  मां मेरे गले लग कर रोने लगी और कहने लगी बेटा यही है बेटियों की जिंदगी ।

 मैंने मां की आंखों के आंसू पोंछे और कहा कि मां मैं जी लूंगी है जिंदगी में फिर भी खुश थी। मुझे शादी का दुख तो था पर लेकिन दिल में करमा था कि उस समय पापा मुझे गले से तो लगा लेंगे। पापा ने मेरा कन्यादान कर दिया अब मैं मां की नहीं किसी और की हो चुकी थी। मैं फिर भी खुश थी। मेरी विदाई के समय पापा ने मुझे गले नहीं लगाया। दादी भैया को लेकर मंदिर चली गई। बिलक बिलक कर रोने लगी मेरे पति ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर कहा कि मैं हूं तुम्हारे साथ ।मैं फिर भी खुश थी जब मैं अपने पति के घर गई सासू मां ने मेरी आरती उतारी और कहा बेटा घर में प्रवेश करो मैं बहुत खुश थी ।सासू मां मुझे मां का प्यार देने लगी ससुर जी पापा की प्यार की कमी को पूरा कर रही थी। मैं बहुत खुश थी कुछ समय बाद जब में गर्भवती हुई तो सासू मां ने कहा कि मुझे बेटा ही चाहिए। मैं फिर भी खुश मेरी बेटी पैदा हुई सासू मां ने मां का प्यार देना बंद कर दिया ससुर जी को तो मैं एक आंख नहीं भाती थी फिर भी मैं खुश थी। पति ने बेटी को छोड़ दो मैंने सोच लिया जो मेरे साथ हुआ है वह अपनी बेटी के साथ नहीं होने दुगीं। इसके के कारण मुझे समाज को क्यों ना छोड़ना पड़े पर मैं अपनी बेटी को नहीं छोडूंगा। मैं अपनी रानी लक्ष्मीबाई बनाऊंगी और बेटियों पर अत्याचार करने बाले फिरंगीयों का सर्वनाश करेगी मैं दुखी नहीं हूं और आज मैं खुश हूं क्योंकि गर्व से कह सकती हूं कि मेरी बेटी 100 बेटों के समान है मेरी बेटी मेरा अभिमान है देश का सम्मान है।


Rate this content
Log in

More hindi story from Dlhs Interschool

Similar hindi story from Tragedy