बारिश
बारिश
एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक छोटी सी लड़की नामकरण की बसती थी। उसकी माँ बिना अम्बरी के जैसी हस्ती थी और उसका बाप एक किसान था, जो खेतों में अपने हाथों से मेहनत करता था। नामकरण की दिल से खुश और उत्साहित छाया जाता था जब बारिश के बाद समुंद्री तरंगों की मीठी खुशबू समुंद्र तक आ जाती थी।
गांव के लोगों के लिए बारिश का आना एक खुशी का पल था। खेतों में उगाई हुई फसलें अपनी उच्चाईयों तक बढ़ जाती थी और समृद्धि घरों में आ जाती थी। बच्चों के चेहरों पर आनंद की मुस्कान फिर से दिखाई देती थी जैसे की किसी आशीर्वाद से हो रही हो।
नामकरण की दिल की खुशी के साथ बारिश के दिनों में खूबसुरत यात्राएं करना पसंद था। वह अकेली बारिश में छटपटाती हुई घूमने का आनंद लेती थी और बूँदों के साथ नाचने का मजा उठाती थी। वह सोचती थी कि बारिश उसके लिए एक सच्चे मित्र की तरह होती है, जो हर दर्द को दुर करके उसके जीवन में खुशियों की बूंदें लाती है।
एक दिन, बारिश की बूंदों से नामकरण की आंखों में खुशियों की अश्रु बिखर गए। वह बारिश की बूँदों का मजा लेने के लिए उसकी मित्र लता के साथ बाहर गई। दोनों बच्चियाँ बारिश में नाचते हुए खेतों में घुस आई और खुद को पूरी तरह समुंदर में डुबकी लगाने लगी। वे मिलकर बारिश की मिठास का आनंद उठाती थीं, जैसे की खुदा ने खुद उन्हें यह अनुभव दिया हो।
बारिश के दिन वो खुशियों की बरसात थी, जिनमें नामकरण और उसकी मित्र लता के बीच की दोस्ती का रिश्ता भी अद्वितीय था। वो दोनों बच्चियाँ बारिश में भिगी हुई, मुस्कुराती हुई और सजीवता से जीने का अनुभव करती थीं।
बारिश की ये कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में छोटी सी खुशियाँ हमारे दिल के कई अहम किस्सों की शुरुआत हो सकती हैं, और असली खुशी छोटी छोटी खुशियों में होती है।
