औरत का जीवन
औरत का जीवन
औरत का जीवन बहुत कठिन होता है औरत का जीवन । पैदा होने से लेकर मरने तक वह कष्ट में ही जीती है और कष्ट में ही मर जाती है । पर इससे मर्दों को क्या ? उनकी जिंदगी तो मौज में गुजरतीं है । एक कहावत है ना कि जाके फटी नहीं बिवाई वो क्या जाने पीर पराई । तो ये मर्द औरत के दर्द को क्या जानें ?
सुबह उठते ही सबसे पहले वह अपना चेहरा आईने में देखती है । अहा ! कितनी सुन्दर दिखती है वह ! अपने ही चेहरे पर वह आत्म मुग्ध हो जाती है और आंखें मूंदकर आत्म मुग्धता में खो जाती है । इतने में पतिदेव की आवाज आती है
"सुनो ! एक चाय मिलेगी क्या" ?
उसका सारा मूड खराब हो जाता है । "थोड़ी सी भी खुशी इन मर्दों को बर्दाश्त नहीं होती है । न तो खुद चैन से रहते हैं और न हम औरतों को चैन से रहने देते हैं" । मन ही मन कोसते हुए वह गैस पर चाय का पानी चढ़ा आती है और फिर से शीशे के सामने आकर अपनी लिपिस्टिक ठीक करने लगती है ।
"इस शेड को लगाते लगाते बोर हो गई हूं मैं ! आज कोई नई शेड लेकर आऊंगी । उस दिन उसकी पड़ोसन श्वेता किटी पार्टी में आई थी ना नई शेड वाली लिपिस्टिक लगाकर । सब लोग कितनी प्रशंसा कर रहे थे उसकी लिपिस्टिक के शेड की ! पर प्रश्न यह है कि वह उसे लाई कहां से थी ? उससे पूछने पर अपनी तौहीन नहीं हो जाती क्या ? इसके लिए उसकी खास सहेली का सहारा लिया गया था । उसने बड़ी चालाकी से पता किया था कि वह उसे एक नये खुले "वीमैन्स हैवन" मॉल से लेकर आई है । आज मैं भी जाऊंगी वीमैन्स हैवन" ।
उसकी आंखों में चमक आ गई । अचानक उसे याद आया कि वह गैस पर चाय का पानी चढ़ाकर आई है तो वह अपने सिर पर एक धौल मारती है और भागकर किचन में जाती है । पानी तो कब का उड़ चुका था भाप बनकर , अब तो औरतों के दिल की तरह वह केतली जल रही थी ।
"हे भगवान" ! कहते हुए वह चाय बनाने लगती है । चाय का प्याला पतिदेव को पकड़ा कर वह फिर से शीशे के सामने खड़ी हो जाती है और एक प्यारी सी स्माइल देती है । "हाय ! कितनी प्यारी स्माइल है उसकी अभी भी ! इसी स्माइल का तो कमाल था जो 'ये' लट्टू हो गये थे उस पर । लेकिन अब इनको मुझे देखने तक को फुर्सत नहीं है । पर कोई बात नहीं । औरतों को तो आदत पड़ जाती है बचपन से ही ऐसे हालातों से रूबरू होने की" । सोचकर उसका चेहरा और भी अधिक खिल जाता है ।
"अरे ! बिट्टू अभी तक सोया हुआ है । उसे स्कूल भी तो जाना है" । तब वह बिट्टू को जगाने लगती है । बिट्टू इतनी आसानी से कहां जगता है ? पूरे दस मिनट लेता है वह । वह फटाफट बिट्टू को जगाकर उसे बाथरूम भेजती है और उसके लिए नाश्ते तथा लंच बॉक्स की तैयारी करने लगती है । कितना काम होता है सुबह सुबह । बीच बीच में मोबाइल पर बात भी करनी पड़ती है उसे । और तो कोई नहीं पर उसकी मम्मी फोन करती रहती है दिन भर ।
"एक मां ही तो अपनी बेटी का ध्यान रखती है । सासू मां को तो फुर्सत नहीं है बात करने की । पता नहीं क्या करती रहती हैं वे ? शायद वे भी अपनी बेटी से बतियाती रहती होंगीं । तभी 'दीदी' का फोन अक्सर बिजी आता है" ।
दिमाग में जब ऐसी बातें चलती रहेंगी तो सैंडविच का जलना तय है । बेचारी औरतें ज़िन्दगी भर जलती रहती हैं तो यदि सैंडविच थोड़ी जल जाये तो भी इन्हें मंजूर नहीं है । झट से टोक देते हैं । मर्द कहीं के ! ये तो नहीं कि जैसी बन जाये वैसी खा लें , नुक्स निकालने में लगे रहते हैं हमेशा । सैंडविच बनाने में हम औरतों की कितनी बार उंगलियां जल जाती हैं , इन्हें क्या पता ? शादी से पहले तो मुझे जरा सी भी चोट लगने पर कितनी हाय तौबा मचाते थे ये , पर अब तो इन्हें कुछ फर्क ही नहीं पड़ता है । मरो कटो , इन्हें क्या ?
वह फिर आईने के सामने आ जाती है । "अरे ! ये सफेद बाल कहां से आ गया" ? उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आती है । और वह उस सफेद बाल को इस तरह उखाड़ फेंकती है जैसे उसने अपने पति की जिंदगी से सुख चैन उखाड़ फेंके थे । सफेद बाल उखाड़ कर फेंकने के बाद उसे कितना चैन मिला था जैसे उसने अपनी जिंदगी के समस्त कांटे निकाल फेंके हों ।
तब उसे याद आता है कि "गुड़िया" भी अभी सो रही है । पूरे 20 बरस की हो गई है मगर अभी भी घोड़े बेचकर सोती है । इस उम्र की लड़कियों को ऐसी गहरी नींद में सोना चाहिए क्या ? हो सकता है कि रात में किसी से देर तक बातें कर रही हो । आजकल की लड़कियां बताती भी नहीं हैं कुछ । वह तो अपनी मम्मी को सारी बातें बताती थी कि कब किसने कैसे छेड़ा था उसे ? कौन सीटी बजाता था ! किसने उसे गुलाब का फूल देने की कोशिश की । पर गुड़िया ने तो ऐसा कभी बताया ही नहीं । क्या किसी ने उसे छेड़ा भी नहीं है अब तक ? यदि ऐसा है तो यह ज्यादा खतरनाक है । जब तक दस बीस लड़के एक लड़की को छेड़ ना लें, तब तक लड़की को अपनी सुन्दरता का अहसास ही नहीं होता है । लेकिन गुड़िया देखने में तो बहुत सुंदर दिखती है फिर उसे किसी ने छेड़ा क्यों नहीं ? ये भी हो सकता है कि उसे किसी ने छेड़ा होगा तो गुड़िया ने उसे अपने स्तर पर "निपटा" दिया होगा । आजकल की लड़कियां डरती थोड़ी ना हैं किसी से । ऐसा ही हुआ होगा शायद । वह अपने मन को तसल्ली देने लगती है ।
इतने में डोरबेल बजती है । कामवाली बाई की एन्ट्री होती है । "अरे ! कितनी सुन्दर 'लटकन' पहन रखी हैं इसने" ! ये कामवाली बाई भी कम नहीं है । जलाने के लिए रोज रोज नये नये गहने पहन कर आती है । पता नहीं कहां से जुगाड़ करती है यह ? कहीं चोरी तो नहीं करती है ? उसे सतर्क रहना होगा इससे ।
"अरे मल्लिका, ये लटकन कहां से ली तुमने ? बहुत सुंदर लग रही हैं" । आजकल कामवाली बाइयों के नाम मल्लिका, बिपाशा, करीना , आलिया जैसे ही होते हैं । ये भी तो मॉडर्न हो गई हैं ना !
लटकनों की प्रशंसा सुनकर मल्लिका फूलकर कुप्पा हो गई । "दीदी , ये हैरिटेज लुक की लटकन हैं । वो सामने वाली दीदी हैं ना , 420 नंबर वालीं , उन्होंने कल ही दी थीं" ।
अब मन ही मन कुढ़ते रहो "क्या जरूरत थी इसे ये लटकन देने की ? हमारी तो मुसीबत बढ़ा दी है ना ! अब हमें भी इसे कुछ न कुछ देना ही पड़ेगा नहीं तो ये मल्लिका पूरी सोसायटी में हमें कंगाल घोषित कर देगी । क्या दूं इसे ? ऐसी वैसी चीज तो लेती ही नहीं है ये । यूनिक होनी चाहिए । बी टैक पास है कोई ऐंवयी नहीं है मल्लिका । अरे हां याद आया ! आज शाम को एक शादी में जाना है । उसके लिए भी एक ड्रेस खरीदनी है । तो एक ड्रेस निकालनी पड़ेगी ना ! वार्डरोब में जगह ही नहीं है रखने के लिए । पहले निकालो फिर लाओ । तो एक ड्रेस दे देते हैं इसे" ।
फिर मल्लिका को वार्ड रोब के सामने खड़ा करके पूछा गया कि उसे कौन सी ड्रेस पसंद है , वही ड्रेस उसे दे दी जाये ।
आजकल कामवाली बाइयों को खुश रखना बहुत बड़ा काम है । न जाने कब किस बात पर नाराज़ हो जाए और चलती बने । बड़ी मुश्किल से मिलती हैं ये बाइयां । हसबैंड तो यूं ही मिल जाते हैं लेकिन बाइयां ढ़ूढने में जान निकल जाती है ।
"ये बाई पीछे मुड़ मुड़कर क्या देख रही है ? कहीं इन पर लाइन तो नहीं मार रही है ? चारों तरफ ध्यान रखना पड़ता है हम औरतों को । पति पर भी और बाइयों पर भी । जरा सी निगाह चूकी कि पति गायब या माल गायब । कितना मुश्किल जीवन है हम औरतों का" !
पतिदेव के ऑफिस जाने के बाद गुड़िया का नंबर आता है । उसे भी तो कॉलेज जाना है । वह उसे उठाती है पर गुड़िया न जाने कौन सी दुनिया में खोई हुई है । उसके चेहरे पर बहुत खूबसूरत सी स्माइल झलक रही है जैसे वह किसी को फंसाने के लिए "चारा" डाल रही हो । उस स्माइल को देखकर वह खुश हो जाती है और उसे विश्वास हो जाता है कि यह भी किसी न किसी "भोंदू" को फंसा ही लेगी । तब वह उसे जगाती हैं
"ओह मम्मा ! सोने दो न प्लीज ! कितना बढ़िया सपना देख रही थी मैं, सब चौपट कर दिया आपने" । तकिये में मुंह घुसाते हुए गुड़िया ने कहा
"अभी भी सपने ही देखेगी या कुछ कर के दिखायेगी" ?
पर गुड़िया समझदार है, झांसों में आकर अपनी पोल नहीं खोलेगी वह । वह तैयार होने चली जाती है और बेचारी औरत फिर से शीशे के सामने खड़ी होकर अपनी तुलना गुड़िया से करने लगती है । कितना अंतर है दोनों में । गुड़िया का चेहरा कितना फ्रेश है और उसका कितना बासी ! आज ही पॉर्लर जाकर फेशियल करायेगी वह ! फिगर भी गड़बड़ा गया है उसका ! लगता है कि जिम ज्वाइन करना पड़ेगा । खुद को मेनटेन रखने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं और ये मर्द कहते हैं कि तुम करती क्या हो दिन भर ! सच में , दिल टूट जाता है यह सुनकर" ।
वह फटाफट शीशे के सामने से हटकर बाथरूम में जाती है और नहाकर तैयार होने बैठ जाती है । काश ! कि वह हमेशा इसी तरह आईने के सामने ही बैठी रहें ! पर लंच भी तो तैयार करना है अभी । सबसे बड़ी समस्या यही है हम औरतों की कि आज लंच में क्या बनायें ? काश्मीर समस्या का हल बहुत आसान है क्योंकि वह एक बार ही होना है पर ये लंच और डिनर की समस्या तो एक दिन में दो बार पैदा होती है । कभी हसबैंड की पसंद का, कभी बेटे की पसंद का तो कभी बेटी की पसंद का खाना बनाते बनाते खुद की पसंद तो भूल ही गई है वह । हे भगवान, कुछ तो रहम कर बेचारी औरतों पर !
अब समस्या ये आ गई कि रात को एक शादी में जाने के लिए क्या पहनें ? इनका कहना है कि कोट डाल लेना, सर्दी बहुत है । पर शादी में कोई कोट पहन कर जाती है क्या ? हम औरतें तो बिना कोट और शॉल के ही शादी अटेंड करती हैं । हुस्न की गर्मी से खुद भी गर्म रहती हैं और औरों को भी गर्म रखती हैं । कितनी परोपकारी होती हैं औरतें ! न जाने कितनों को विटामिन ए और विटामिन बी, सी, डी देती हैं, कुछ गिनती नहीं है फिर भी ये मर्द लोग हम औरतों के कपड़ों पर टीका टिप्पणी करने से बाज नहीं आते हैं । हम औरतों से ही मर्दों का अस्तित्व है तभी तो हमारे आगे पीछे भंवरे सा डोलते रहते हैं ये लोग । लेकिन कभी भी अपनी बीवी की तारीफ में एक शब्द भी नहीं निकालते हैं । वैसे तो दुनिया भर की औरतों की तारीफ करते फिरेंगे लेकिन पत्नी की तारीफ में बोल नहीं फूटते हैं । पर हम औरतें भी कम नहीं हैं । गिन गिन कर बदला लेती हैं इनसे । जीना हराम कर देती हैं इनका , तभी चैन आता है । जब इतना कठिन जीवन हो औरतों का तो अगर वे ऐसा सलूक करें तो क्या यह ग़लत है ? नहीं है ना !
