अधूरी कहानी
अधूरी कहानी
पहली बार उससे अंग्रेजी स्पीकिंग के कक्षा में मिला था, कक्षा नौ में था मैं,वो भी समान कक्षा की थी। सांवला रंग, मृग- नयनी , काले लंबे बाल । हम अक्सर हस -हस कर बाते किया करते थे। दिन बीतते गए हम ऐसे ही बात करते रहे, प्यार क्या होता है ओ मैने केवल फिल्मों में ही देखा था। एक दिन मै लेटा हुआ था अचानक ओ मेरे ख्यालों में आ गई मैंने सोचा बात करते है याद आ गई होगी।
फिर दूूसरे दिन भी ये हुआ, फिर ये हर शाम को होने लगा अब तो उसका चेहरा भी सामने नजर आने लगा । छोटी उम्र थी समझ नही आ रहा था ये क्या हो रहा है पर फिल्मों में इतना देखकर समझ आ गया था की ये प्यार जैसा ही कुछ है, दिन बीतते गए हालत ये हुई की अब उसको देखे बिना चैन नहीं आता , उससे मिलने का समय केवल एक घंटा ही होता था क्योंकि हमारी स्पीकिंग क्लास एक घंटे की ही होती थी और ये एक घंटा मेरे लिए सबसे खुशी के पल होते थे क्योंकि ओ मेरे सामने रहती थी जब ओ आस-पास रहती थी तो बहुत शकुन मिलता था पता नही क्यों ।
हालात इस तरह हो गए की हर तरफ वो ही दिखने लगी , रात की नींद गायब हर वक्त बस उसे ही सोचता रहता कभी - कभी आंखो में आंसू भी आने लगे। कह तो नही सकता पर शायद मुझे प्यार हो गया था। धीरे धीरे ये दर्द बेकाबू होने लगा। तब मैने सोचा क्यों न उसे सब कुछ बता दे पर दिल मे डर था अगर उसे ये बातें पसंद नहीं आईं तो हमारी दोस्ती भी टूट जायेगी, इससे अच्छा तो यही है ये सब दिल में ही रहने दिया जाए, कम से कम हमारी दोस्ती तो कायम रहेगी।
पर नहीं मुझसे अब रहा नही जा रहा था , दिल में एक और ख्याल आया कि क्या वो भी ऐसा ही महसूस करती है।पर मुझे कैसे पता चलेगा ये ।
एक दिन मै किसी से बात कर रहा था तभी अचानक देखा की ओ मुझे छुप कर देख रही थी मैने उसे देखा, पर न देखने का नाटक किया। धीरे -धीरे वो भी मुझे इशारे देने लगी, मै समझते हुए भी अंजान होने का नाटक करता रहता। अब हम दोनो की आंखो में प्यार साफ झलकता था पर कह कोई न सका, हमारे एहसास एक थे पर बयां कोई न कर सका । ये चलता ही रहा , अब हम कक्षा दस में आ गए , पापा ने बोला बेटा अच्छे से पढ़ना हमारी उम्मीदें तुमसे ही जुड़ी है। पापा की उम्मीदें और कच्ची उमर का प्यार एक का साथ तो छोड़ना ही था , दोनो को साथ लेकर चलते तो पापा की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते और एक को साथ लेकर चलना मतलब दिल का दर्द और तन्हाई।
फैसला तो करना ही था मैने बहुत सोचा पापा भारी पड़े और मैने स्पीकिंग क्लास छोड़ने का निर्णय ले लिया।एग्जाम हुआ बोर्ड में ७०% आए। पर ओ प्यार का एहसास दिल से गायब हो गया था, यूं कहें की एहसास तो दिल में अब भी था पर दिल के किसी कोने में छुप गया था अब।कहते है न विधाता ने समय के साथ हर दुःख को भूल जाने की शक्ति दी है नही तो इंसान अपने पिछले दुखों को ही सोचकर रोता और उसकी जिंदगी में आगे के सभी रास्ते बंद हो जाते।
हम खुश है पर कहीं न कहीं वो प्यार आज भी कभी -कभी उजागर हो जाता है , पहला प्यार था शायद जिंदगी भर न भुला जा सके। दस साल हो गए आज हम एक दूसरे से आज तक दुबारा नही मिल पाए। हमारी अधूरी कहानी पूरा होने के लिए रास्ता अभी तक खोज रही है पर रास्ते अभी तक गुमनाम ही है।
