KAVITA YADAV

Inspirational


3.5  

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आशा की समझदारी

आशा की समझदारी

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एक लड़की थी आशा नाम की वो अपने माता पिता के साथ बहूँत ही खुश रहती थी। वो अपने माता पिता की इकलौती संतान ओर लाडली थी। इसलिए उनकी बेटी जो कहे वो उसके माता पिता मान लेते थे।

आशा की दोस्ती उसके कॉलेज के एक लड़के छितिज से थी। आशा और छितिज दोनों ही मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। जब मेडिकल की पढ़ाई पूरी हूँई तो छितिज अपने शहर वापस जाने लगा और वहां उसे उसके पिता द्वारा खोले गए क्लिनिक में काम करना था। तब आशा ने कहा छितिज में भी आप के साथ चलना चाहती हूं।तब छितिज ने कहा आशा विना शादी के तुम मेरे साथ नहीं चल सकती पर वो नही मानी,ओर अपने माता पिता से ये कह कर की में भी छितिज के साथ मिलकर उसके क्लिनिक में काम करूँगी ,छितिज के साथ चली गयी और उसके माता पिता भी मान गए।

इस प्रकार छितिज के साथ आशा उनके घर मे ही लगभग 3 साल तक रही ओर वो भी छितिज के माता पिता की रजामंदी से, और कुछ समय बाद दोनों के ही माता पिता ने मिलकर दोनों की शादी कर दी। 

शादी के बाद आशा को घर की भी जिम्मेदारी लेनी पड़ी।और उसने कुछ समय के लिए क्लिनिक जाना छोड़ दिया।पर उसने देखा छितिज कई बातें उसे झूठ बोलता है।और उसकी तो झूठ बोलने की बोहोत बुरी आदत है।हर बात में झूठ क्लिनिक की जगह अपने दोस्तों के साथ घूमना फिरना वतमीज़ी से बात करना,अपने माता पिता की भी कोई रिस्पेक्ट नही करना।उसको समझ नही आया कि आखिर छितिज में ऐसी आदत क्यों है। वो मेरे से अच्छे से बात भी नही करता आशा का सब पर से विशवास उठ जाता है उसका तो छितिज के साथ एक खुशहाल जीवन जीने का सपना ही टूट जाता है। पर उसने अपने मन के अंदर एक आशा बनाकर अपनी सास से इस विषय मे बात करने की ठान ली।

उसने सब कुछ पता करनी की सोची ओर अपनी सासु मा के पास जाकर पूछने लगी मम्मी जी छितिज आखिर ऐसा क्यों करते है।हर बात झूठ बोलना मेरी कोई फिकर नही आप लोगो की भी कोई रिस्पेक्ट नही करता आखिर ऐसा क्यों करता है।

तब उसकी माँ ने कहा बेटा छितिज की एक बहन भी थी। संजना दोनों एक दूसरे से बोहोत प्यार करते थे।एक दिन छितिज और उसकी बहन अपनी ही कार से शॉपिंग करने गए थे। कि संजना ने कहा भैया आप जाओ शॉपिंग करो मेरा कुछ सिर दर्द होने लगा है।तो में अंदर नही आऊँगी। तो उसके भैया ने कहा ओके संजना शॉपिंग कल कर लेंगे ..पर संजना नही मानी तब उसका भाई माल में शॉपिंग करने चला गया।

पर...जब आता है।तो उसके सामने ही उसकी बहन का भयंकर एक्सीडेंट होता है।और वही पर उसकी बहन की डेथ हो जाती है।तब से बो बोहोत दुखी रहने लगा था।उसके पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे।पर उसे इस पढ़ाई से नफरत थी।वो डॉक्टर नही बनना चाहता था।उसका कहना था।अगर वक्त पर कोई मेरी बहन को अस्पताल ले जाता तो वो बच जाती पर ऐसा नही हूँआ इस बजह से उसे डॉक्टर के काम से नफरत हो गयी थी।पर अपने पिता के कहने से वो डॉक्टर बन गया।अब उसकी माँ कहती है। इस वजह से ही वो शायद क्लीनिक नही जाता तुमसे रोज झूठ बोलता है कि में क्लिनिक जाता हूं।मुझसे उसके पिता से सबसे झूठ बोलता है।

तब आशा अपनी सास से कहती है।सासू माँ में छितिज को वापस अपने जीवन मे लेकर आऊंगी ओर हम साथ मे ख़ुशी खुशी रहेंगे भी ! तब वो अपने पिता से कहती है। पापा आप छितिज को ओर मुझे किसी भी बहाने बुलाओ अपने घर ,तब उसके पिता छितिज को फोन करके कहते है बेटा मेरी तवियत सही नही है।तुम आशा को मुझसे मिलाने ले आओ तब छितिज सोचता है।मेरी इस तरह की करतूतो का असर आशा के माता पिता को सही नही लगा शायद..वो तुरंत ही आशा को लेकर उसके माता पिता के घर चला गया पर जब देखता है उसके पापा तो स्वस्थ है। वो वापिस जाने लगता है।तब आशा कहती है। अच्छा छितिज गुस्सा मत करो हम कल वापिस चले जायेंगे।पर चलो आज में तुम्हें कहि घुमाने लेके चलती हूँ।

ओर आशा छितिज को अनाथाश्रम लेकर गयी।क्योंकि उसके पिता ने ही इस अनाथाश्रम की नींव डाली थी।। आशा सभी बच्चों से छितिज को मिलाने लगी तब उनमे से एक बच्चा जो सही से नही चल पाता था। उसने छितिज से कहा सर, आप मुझे बहार ले कर चलेंगे छितिज ने पूछा क्यों ?तुम बहार क्यों जाना चाहते हो।तब उस अनाथाश्रम की हेड ने कहा उसके मम्मी पापा इसी अनाथाश्रम के सामने ही एक्सिरेड में मर चुके है।पर उसे लगता था। वो वही पर अभी भी है।

तब छितिज को लगा ये तो केवल 12 साल का ही बच्चा है।फिर भी जी रहा है।बिना कोई झूठ बिना कोई अपराध के फिर में क्यों अपने आप को इतनी सजा दे रहा हूं।में संजना के नाम से एक अस्पताल खोलूंगा ओर उसमे फ्री में हरेक का इलाज करूँगा।ओर फिर उस बच्चे को अपने साथ लेकर छितिज और आशा चले गए उसका दोनों ने मिलकर इलाज किया और उसे गोद ले लिया ओर उसका स्कूल में एडमिशन करा कर ख़ुशी ख़ुशी सब रहने लगे।


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