STORYMIRROR

Pradeep Nair

Abstract

4  

Pradeep Nair

Abstract

यूँ तो है लोगों का मेला यहाँ

यूँ तो है लोगों का मेला यहाँ

1 min
536

यूँ तो है लोगों का मेला यहाँ

चेहरे सब अजनबी पर देखूं जहाँ

अपनी ही धुन में भागता हर शख्स

जाना चाहता हैं जाने कहाँ


उलझनों की कडियों में उलझा हुआ

फिर भी सपनो की दुनिया बसाता हुआ

लेकर साथ कुछ अधुरी कहानियाँ

जाना चाहता हैं जाने कहाँ


यूँ तो है लोगों का मेला यहाँ

चेहरे सब अजनबी पर देखूं जहाँ


वक्त की आँधी को चीरता

अपने ही अस्तित्व को तलाशता

सदियों से चला जो ये कारवाँ

जाना चाहता हैं जाने कहाँ


यूँ तो है लोगों का मेला यहाँ

चेहरे सब अजनबी पर देखूं जहाँ


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract