STORYMIRROR

anjali dixit

Abstract Romance

3  

anjali dixit

Abstract Romance

## ये शाम

## ये शाम

1 min
473

कभी यादों मे सिमट कर

कभी आँचल मे लिपट कर

चहक रही है मेरे गले लग कर  

ये शाम। 


बड़ी हसीन ख्वाहिशें हैं

बड़ी दिलकश उम्मीदें है

उन उम्मीदों के सिरहाने

बैठी है ये शाम। 


सर्द मौसम का बहाना है

इंतज़ार के कई लमहे है

उन लमहों की सरसराहट में

घुली है ये शाम। 


क्या कभी आयेगी तू

मेरे दिल को छू पायेगी तू, 

अपनी हलकी सी मुस्कान लिये

बिखराते हुए अपना प्यार,

 ऐ शाम। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from anjali dixit

Similar hindi poem from Abstract