यादों की परछाई
यादों की परछाई
तुम वही हो न, जिन्हें हम पहचानते हैं,
तुम्हारे बीते हुए कल को अब भी जानते हैं,
जो हर छोटी–सी बात पर मुस्कुराते थे, हम मानते हैं,
तुम वही हो न, जिन्हें हम पहचानते हैं।
ना कल की फिक्र थी, ना आज की चिंता,
सपनों को संजोना था, यादों को बुनना ,
हर गलती भी हँसीं में टल जाती थी, हम मानते हैं,
तुम वही हो न, जिन्हें हम पहचानते हैं।
हल्की सी डाँट से आँखें छलक जाती थी,
छोटी –छोटी खुशियों में दुनिया सिमट जाती थी,
अब वो मुलाकात हो नही पाएगी, हम मानते हैं,
तुम वही हो न, जिन्हें हम पहचानते हैं।
अब लौटेंगे नही, ये भी सच मानते हैं,
पर यादों में तुम हमेशा रहोगे, किसी पुराने गीत की तरह,
हम मानते हैं,
तुम वही हो न, जिन्हें हम पहचानते हैं।
