यादें
यादें
ये यादें और वो छोटे छोटे चीज,
जब भी याद आती हैं कहते तो हैं,
तू समाता जा, समाता जा, समाता जा...।
कभी वो चीज़ें कश्ती बनती
और वो यादें गहरा समुन्दर और कहता है
तू बहता जा, बहता जा, बहता जा ......।
कभी वो चीज छोटी सी सितारा बनती
और वो यादें घना नीला आकाश और कहता है
तू देखता जा, देखता जा, देखता जा ..... ।
कभी वो चीज़ पानी बनती
और वो यादें प्यास बनती और कहती है
तू पीता जा, पीता जा, पीता जा .......।
कभी वो चीज़ शराब बनती
और वो यादें नशा बनती और कहती है
तू चढ़ ता जा, चढ़ता जा, चढ़ता जा .....।
कभी वो चीज ये बनती वो यादें वो बनती
मगर जब कभी भी सामने आती
बस रुलाती, हँसाती, कहती और समझाती .......।
