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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

Abstract

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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याद उनको भी कर लो( 73 )

याद उनको भी कर लो( 73 )

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धनघौर अंधेरी रात है,

 हम-सब अपने-अपने घर है,

गांव-शहर में परिवार के साथ है,

मेरे देशवासियों उनको भी करें याद, 


करलो जो सीमा पर पहरा दे रहे है,

जो सरहद पर जाग रहे है,

हम यहां होली खेल रहे है,

जरा उनसे भी पूछ लो,


जो दुश्मनों के खून से 

खेल रहे है वो होली,

धन्य है वो 

माँ-बाप और पत्नी-बच्चे,

जिनके जिगर का टुकड़ा 


जिसने अपने शौहर को,

और ...…,

उन बच्चों के पिता,

सब ने दिया है सीमा के रक्षा हेतु,

जिसके कारण हम खेल सके होली

अपने गांव परिवार के साथ !!


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