Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

याद जब प्रियतम की आई

याद जब प्रियतम की आई

1 min
296


बादल सी आँखों से आज फिर वर्षा हुई  

शरीर में एक झंकार महसूस हुई

दिल की तारें एक बार फिर छिड़ी 

कदम एक बार फिर मचलाए 

याद जब प्रियतम की सताए


वह चपला फिर कमज़ोर पड़ी 

समुन्दर सा विशाल हृदय लिए

एक बार फिर रो पड़ी 

हरी हरी घास पर

ठहाकों का मोर भी नाचा

पर वर्षा लगातार होती रही 

दांतों का मेंढक भी कौंधा

अपनी सफेदी लिए

हाथों की छतरी बारिश से

एक बार फिर बची

ख्यालों की झोपड़ी में

सहारा लेने एक बार फिर गयी


यूँ बाढ़ आ गयी

फफकना रुपी गर्जना हुई 

बादल ने  कौतूहल मचाया

मन बेचैनी से पगलाया

पकड़ों की भूक तक मिट गई

याद जब प्रियतम की आई।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance