STORYMIRROR

ankit shukla

Abstract

4  

ankit shukla

Abstract

वो याराना याद है...

वो याराना याद है...

3 mins
563

ये ऑफिस से लौटने के बाद कि बातें हैं

कुछ धुंधली सी कुछ प्यारी सी कुछ दोस्तो की यादें हैं

कुछ मेरे बचपन के तो कुछ जवानी के कारनामे हैं

मेरे और मेरे दोस्तो के बीच हुई 

ये उन दिनों की बातें हैं


तो बात कुछ ऐसी है कि वो यूँ ही पूछ बैठा

क्या तुझे वो वक्त याद है ? तो मैंने कहा

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


क्लास में होमवर्क न करने पर

साथ बाहर किया जाना याद है

सबके साथ मिलकर मोटू को खूब चिढ़ाना याद है

अपने जन्म दिन में सबसे लात घुसे खाना याद है

मेरा उस लड़की के नाम के साथ तुम्हारा चिढ़ाना याद है

यार छूटे हैं जनाब पर वो याराना याद है


सबको पसंद थी जो मैथ वाली टीचर वो टीचर वो याद है

टिफिन में लड़ झगड़ कर साथ साथ खाना याद है

टिफिन छीनते वक़्त वो रोटियों का गिर जाना याद है

और रोटियां न मिलने पर सब्जी लेकर भाग जाना याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


शर्ट तेरे पापा की है न ?, कहकर चिढ़ाना याद है

और दोस्तो को उनके पापा के नाम से बुलाना याद है

तो कभी भिखारी सी है शकल उसकी उसको ये बताना याद है

कब से धुली नही है ये जीन्स तेरी? उससे ये पूछना याद है

यार छूटे हैं जनाब पर वो याराना याद है


"शर्ट चोरी की है न तेरी ?" कहकर खिलखिलाना याद है

सबसे पहले समोसा खा कर पैसे दिए बिना भाग जाना याद है

15 रुपये की मैगी में 15 दोस्तो का खाना याद है

और जन्मदिन पर उसे ही पीटकर 

उसी के पैसे से दबाकर खाना है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


कैंटीन वाले भैया के साथ बिज़नेस करेगे वो प्लान याद है

कोचिंग के पहले या बाद में खाया

वो समोसा पोहा और जलेबी याद है

नव रात्री के दिनों में हर जगह प्रसाद खाना याद है

और सारी रात बाइक में ट्रिप्प्ललिंग करके घूमना याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


दोस्त का 50 का 

बाइक में पेट्रोल डलाना याद है

और हा होली के दिन सबकी शर्ट का वो फटना याद है

अंडो का वेजेटेरियन दोस्तो के ऊपर फोड़ना याद हैं

कॉलेज के फेयरवेल में टल्ली हो कर सबका नाचना याद हैं

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


पार्टी में सीनियरस के साथ फोटो खींचाना याद है

दोस्तो से छुपकर अपनी वाली के

साथ कैंटीन में मैगी खाना याद है

अपनी वाली को नजदीक से जहाँ पे

देखा था कॉलेज का वो कोना याद है

जहा जहा मिली थी तब वो मुझसे अब भी

कॉलेज का वो कोना कोना याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


बस स्टॉप में लड़की के मिलने पे

सालों का न पहचानना याद है

क्लास में बैठकर सालों का

गंदी गंदी गालिया सिखाना याद है 

बस में पीछे बैठकर गाने गाना याद है

मेरी हरकतों की वजह से तुझे बाहर किया जाना याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


क्लास में टीचर के सामने अपनी वाली

को देखकर मुस्कुराना याद है

फिज़ूल वक्त में अपनी वाली से नजरे मिलना याद है

उस से हुई वो प्यार वाली बाते याद है

तेरी वाली ने किये थे जो तुझसे कसमे वादे

 वो झुटे कसमे वादे याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है


सच बताउ तो अपनी दोस्ती का वो हर कारनामा याद है

दोस्ती यारी में की हर बचकानी हरकते याद है

एग्जाम के बाद सारे डिस्कसन याद है

अपन सब की असीम दोस्ती का दोस्ताना याद है

यार छूटे है जनाब पर वो याराना याद है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract