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Manju Saini

Inspirational

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Manju Saini

Inspirational

विरह

विरह

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ओ सखी….

बादल गरजे

सावन बरसे

मन प्यासा

प्यास का प्यासा।


ओ सखी….

नीम की डाली

नही पड़े झूले

कोई न गाए

सावन के गाने।


ओ सखी….

आम के बाग

कोयल न बोले

नाचे न मोर

खड़ा रे उदास।


ओ सखी….

आये नहीं कागा

न कोई संदेश

मन का पपीहा

प्यासा का प्यासा।


ओ सखी….

कासे कहूँ सजनी

साजन न आये

न पता न ठिकाना

मन में हैं रोना।

ओ सखी….


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