Mahavir Uttranchali
Abstract
धन्य हमारी मातृभूमि
धन्य हमारे वीरवर
लौट आये कालमुख से
शत्रू की छाती चीरकर।।
बढ़ चले विजयनाद करते
काल को परास्त कर।
रीढ़ शत्रू का तोड़ आये
वज्र मुश्त प्रहार कर।।
पीछे न हट सके वो पग
जब काल का प्रण किया।
रणबांकुरों ने ऐसे हँसके
मृत्यु का वरण किया।।
शब्द यदि हर अ...
अपनी पीर बतात...
दिल से तुझको ...
यारो जब भी वो...
शिल्प कुशल रा...
बख़्श दी है जा...
महारानी एलिजा...
अशोक महान
हर्षवर्धन महा...
ऑन कर स्विच ज़...
हमने सदैव सिद्धांतों के उलटे ही अर्थ निकाले हैं। हमने सदैव सिद्धांतों के उलटे ही अर्थ निकाले हैं।
हजारों इमारतों का निर्माता, दर-दर भटकने को मजबूर हूँ, हजारों इमारतों का निर्माता, दर-दर भटकने को मजबूर हूँ,
सब कुछ अस्त व्यस्त और व्यवस्थित रूप से जर्जर हो चला है सब कुछ अस्त व्यस्त और व्यवस्थित रूप से जर्जर हो चला है
जीवन के सागर में चलो फिर से मिलकर गोते लगाते हैं जीवन के सागर में चलो फिर से मिलकर गोते लगाते हैं
कभी उनको मिले ही नहीं या उन्होंने स्वीकारा नहीं कभी उनको मिले ही नहीं या उन्होंने स्वीकारा नहीं
कभी हँसाती, कभी रुलाती, कभी सताती बीती यादें कभी हँसाती, कभी रुलाती, कभी सताती बीती यादें
शिवजी से वरदान प्राप्त कर निष्कंटक पथ होना था। शिवजी से वरदान प्राप्त कर निष्कंटक पथ होना था।
बरसात की नन्ही नन्ही बूंदें मुझे ना छुए, इसलिए वो आंचल से छुपा लेती है, बरसात की नन्ही नन्ही बूंदें मुझे ना छुए, इसलिए वो आंचल से छुपा लेती है,
काश ऐसा होता तो अच्छा होता अगर ऐसा नहीं होता तो अच्छा होता न कभी चैन, न कभी आराम मिला काश ऐसा होता तो अच्छा होता अगर ऐसा नहीं होता तो अच्छा होता न कभी चैन, न कभ...
अपने माँ बाप को भी निहित स्वार्थ वश मौत की ओर ढकेलने में भी नहीं शरमाते हो। अपने माँ बाप को भी निहित स्वार्थ वश मौत की ओर ढकेलने में भी नहीं शरमाते हो...
आइए कहानी की कहानी जानते हैं कहानी की व्यथा भी सुनते हैं। आइए कहानी की कहानी जानते हैं कहानी की व्यथा भी सुनते हैं।
फिर किसी से न इश्क़ हो पाया इसलिए मैंने शायरी कर ली। फिर किसी से न इश्क़ हो पाया इसलिए मैंने शायरी कर ली।
जिसमें उसकी जो मर्जी हो वह खुशी की एक रोशनी है। जिसमें उसकी जो मर्जी हो वह खुशी की एक रोशनी है।
एक जुगनू ने चमक कर निशा जग मगायी, सितारे फिर जल के आसमांन में मर गए ! एक जुगनू ने चमक कर निशा जग मगायी, सितारे फिर जल के आसमांन में मर गए !
जीवंत हैं हम इसलिये हर गुजरते हुये पल में जीवंतता को देख लेते हैं। जीवंत हैं हम इसलिये हर गुजरते हुये पल में जीवंतता को देख लेते हैं।
लग रहा है आदमी को घेरे हुये विचार बरस रहे हैं पानी की तरह लग रहा है आदमी को घेरे हुये विचार बरस रहे हैं पानी की तरह
तुम्हारे गालों पर अपने लबों से गिरते शहद की बारिश करने जा रही हूँ आँखें मूँदे महसूस क तुम्हारे गालों पर अपने लबों से गिरते शहद की बारिश करने जा रही हूँ आँखें मूँद...
ज़रा ध्यान रखना अपनी प्रिय मिथ्या का कहीं उसे भगा ना ले जाऊँ। ज़रा ध्यान रखना अपनी प्रिय मिथ्या का कहीं उसे भगा ना ले जाऊँ।
उदासी की बहती हुयी हवा में आंखें झेलती हैं उदासी का दंश। उदासी की बहती हुयी हवा में आंखें झेलती हैं उदासी का दंश।
सुन्दर दिखता अम्बर भी है जो ठंडी का कोप सहा।। सुन्दर दिखता अम्बर भी है जो ठंडी का कोप सहा।।