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धीरज साव

Tragedy

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धीरज साव

Tragedy

विचलित

विचलित

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हे

पिता ,मन विचलित है,

तन विचलित है, आप के जाने से

जीवन विचलित है,

आप के स्वर्ग विराजने से।

घर विचलित, वो आँगन विचलित

जीवन का उद्देश्य विचलित।

वह यादें विचलित।

वह कल विचलित, वह पल विचलित।


विचलित है जीवन का हर क्षण ,

आप के चिर निद्रा में सो जाने से।

मुख मंडल की शोभा विचलित ,

वह दिन विचलित, रातें विचलित।

मेरी प्यारी माँ का मस्तक विचलित,

परिवार के सपने विचलित ,

हृदय विचलित, साँसे विचलित।

विचलित है तन मन, विचलित है हर क्षण।

हे पिता, आप के चिर निद्रा में जाने से।

                                            


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