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Harsh saxena Bhopal

Abstract

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Harsh saxena Bhopal

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वह गरीब बच्चे

वह गरीब बच्चे

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खेलतेऔर खिलखिलाते बच्चे

पापा की बेत और मकान की रेत


में खेलते और खिलखिलाते बच्चे

मेरा मन होता में इन्हें भी सँवार दूँ

अपने कपड़े और खिलौने

देकर उन्हें भी सवार दूँ।


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