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Kavita Gautam

Inspirational

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Kavita Gautam

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"ऊंचाइयां"

"ऊंचाइयां"

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उडूं में आसमां में तो

पैर मेरे जमीं पर हो

ख्वाहिशें हो मेरी ऊंची

सफर मेरा जमीं पर हो

भले ही ताज हो सिर पर

नजर मेरी जमीं पर हो

ऊंचाइयां कितनी भी पा लूं

जड़े मेरी जमीं पर हो

इरादे हो मेरे सच्चे

मेरी हस्ती जमीं पर हो

दूर जाऊँ मैं कितना भी

साथ में मेरे अपने हो

खास हो जाऊं कितना भी

साथ अपनो का कम ना हो

मुश्किलें आए कितनी भी

मेरी पहचान गुम ना हो

मंजिले ना मिले भी तो

ना कुछ खोने का गम हो

रास्ते नेक हो मेरे

मेरी मंजिल भी पावन हो।।



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