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Anita Shrivastava

Abstract

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Anita Shrivastava

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तुम्हारा प्यार

तुम्हारा प्यार

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कोरोना का कालकूट

रहा हो दुनियाँ को लूट

सब घरों में बंद हैं

जैसे नज़रबंद हैं

दिल ही दिल मे रहते हो

तुम भी कुछ कहते हो

जैसे कि जाना मत

घर से निकल जाने का

बहाना बनाना मत

अब तुम्हे मैं क्या बोलूं

मौत नाच रही उधर

अधर यहां क्या खोलूं

शायद इन साँसों में

नाम एक तुम्हारा हो

शायद इन आँखों में

रुप एक तुम्हारा हो

इसीलिए छुआ नहीं

अब तक कोरोना का

संक्रमण हुआ नहीं

प्यार का संक्रमण

कर रहा अतिक्रमण

कोरोना कर न सका

मुझ पर फिर आक्रमण।



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