काव्यवीर नमन
काव्यवीर नमन
1 min
147
वीर तुम लिखे चलो
धीर तुम लिखे चलो
हाथ में कलम रहे
फिर न कोई ग़म रहे
थोड़ी थोड़ी देर में
जैसे रुई के ढेर में
रचनाएँ पक रहीं
पेड़ से टपक रहीं
सुबह एक शाम एक
दिन भर लिखीं अनेक
दिन जयंती देख कर
लिख रहे हैं पेट भर
कलम के सिपाही को
नमन वाहवाही को
शब्द शब्द वाणी की
कृपा हो भवानी की
सुबह जो लिखा गया
शाम तलक खप गया
अगले दिन छप गया
फिर कहीं खिसक गया
