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Anita Shrivastava

Others

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Anita Shrivastava

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काव्यवीर नमन

काव्यवीर नमन

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वीर तुम लिखे चलो

धीर तुम लिखे चलो

हाथ में कलम रहे

फिर न कोई ग़म रहे


थोड़ी थोड़ी देर में

जैसे रुई के ढेर में

रचनाएँ पक रहीं

पेड़ से टपक रहीं


सुबह एक शाम एक

दिन भर लिखीं अनेक

दिन जयंती देख कर

लिख रहे हैं पेट भर


कलम के सिपाही को

नमन वाहवाही को

शब्द शब्द वाणी की

कृपा हो भवानी की


सुबह जो लिखा गया

शाम तलक खप गया

अगले दिन छप गया

फिर कहीं खिसक गया



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