STORYMIRROR

Sigma Mohanty

Abstract Romance

3  

Sigma Mohanty

Abstract Romance

तसव्वुर

तसव्वुर

1 min
5

तसव्वुर में आज भी कुछ इस कदर बसा हुआ है तु।
तसव्वुर में आज भी ... कुछ इस कदर बसा हुआ है तु।।

कि अब तो मेरी रूह भी तुम्हारे साये की पनाह में सांस लेती है।
कि अब तो मेरी रूह भी... तुम्हारे साये की पनाह में सांस लेती है।।

मौत भी मुझसे रूठ कर रुखसत हुई।
मौत भी मुझसे... रूठ कर रुखसत हुई।।

क्यूकि ता उम्र तो मैरी जिंदगी तुझमें बसी थी...बस तुझमें बसी थी।


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Sigma Mohanty

Similar hindi poem from Abstract