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Phool Singh

Inspirational

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Phool Singh

Inspirational

तर्क-वितर्क और मंजिल

तर्क-वितर्क और मंजिल

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हौंसला और मंजिल एक दिन, आपस में दोनों उलझ पड़े

पा सके न मुझे जीवन में, चाहे रख लो अरमान बड़े||


हर मार्ग पर रुकावट डालूँ, दे लो तुम इम्तिहान बड़े

ध्येय से तुझको पीछे धकेलूँ, बुद्धिमान रहो तुम बढ़े-चढ़े||


हौंसलों ने जवाब कहा, मंजिल तेरे है महल बड़े

शानौ-शौकत तुम जीवन लाती, बलिदान भी लेती बड़े-बड़े||


औकात दिखा दूँ में भी लेकिन, जब मुझ जैसों से पाला पड़े

गर्व को तेरे चकना चूर मैं कर दूँ, जब हौंसलों संग इंसान लड़े||


पैरों में गिरकर माफी मांगे, तब मंजिलों की न एक चले

त्याग सुख-सुविधा इस जीवन की, कड़ी मेहनत के साथ लड़े||


अच्छे-अच्छों को धूल चटा दे, हौंसले संग जब उड़ान भरे

सफलता ढूंढती अपना बसेरा, बुद्धि-हौंसले जब साथ लड़े||


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