तपिश से शीतलता: मानवता का संदेश
तपिश से शीतलता: मानवता का संदेश
सूरज सी गर्मी, और हिम्मत का वरदान लिए,
तू अंधेरों को चीरने का पूरा अरमान लिए।
पर असली ताकत तो वो है, जो शोर से दूर हो जाए,
चुपचाप जलकर, हर दर्द को सीने में समाए।
वह तेज अब तपिश नहीं, मरहम बन कर उतरे,
खामोश समंदर सा गहरा, इस दिल में आ ठहरे।
एक सुकून भरा साया हो, इस तड़पती दुनिया पर,
जहाँ हर घाव भर जाए, उस ठंडी छांव के असर पर।
यह शांति कोई कमजोरी नहीं, यह रूह का उजाला है,
जिसने नफरत के हर साए को, प्यार से संभाला है।
जब भीतर का तूफान थमे, और मन शांत हो जाए,
तभी इंसानियत का यह जग, सच में जी पाए।
चलो मिलकर इस ऊर्जा को, एक नया आयाम दें
,
सूरज की इस तपिश को, हम शांति का नाम दें।
हर दिल में दया की ज्योत जगाकर, नेकी का दीप जलाएं,
इस पावन धरती पर हम सब, अमन का संदेश सुनाएं।
