STORYMIRROR

Subhalaxmi Das

Inspirational

4.6  

Subhalaxmi Das

Inspirational

तन्हाई

तन्हाई

1 min
411


खुशहाली की उम्र ज़िंदगी में कम रहने से

उसी कमी को पूरी करने की कोशिश से

दूरियाँ बढ़ने लगती है...


जाहिर सी बात है

एक कमी सी रहती है

जब अपने ही बहुत प्यार से

दिल पे वार किया करते हैं....


जब रात की ठंडी हवा किसी बेघर को

सरे आम नंगा करके

दिल पे वार किया करती है.....


जब कोई भूखा नसीब को कोसते हुए

जूठा खाना बड़े प्यार से उठाता है

तो उसे देख

दिल पे वार हो ही जाता है ....


तब इंसानियत की छाँव तले......

महक उठती है तन्हाई ........


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Subhalaxmi Das

Similar hindi poem from Inspirational