तहखाना
तहखाना
जैसे घर में एक तहखाना होता है
हर दिल में कहीं ना कहीं
एक छोटा अंधेरा कोना होता है
तहखाने में होता है टूटा फूटा बेकार सामान
उस कोने में होते हैं कुछ अधूरे से अरमान
जो पूरे हो नहीं सकते
कुछ यादें..कुछ बातें
जो किसी से कह नहीं सकते
तह पर तह लगती रहती है
अनदेखी की धूल उन पर जमती रहती है
पर तहखाना जिस दिन खुलता है
भूला बिसरा बहुत कुछ मिलता है
कर लो जो कुछ करने का सोचा था
तब जिम्मेदारी का बोझा था
अब शायद मौका मिल जाए
नए द्वार कोई खुल जाए
यह तुम सोचो तुम्हें क्या करना है
फिर से सब कुछ तहा के रखना है
या जीवन की नई राह को चुनना है!
