STORYMIRROR

Hiren Mehta

Abstract

2  

Hiren Mehta

Abstract

सूरज तेरा मुक्कदर होगा

सूरज तेरा मुक्कदर होगा

1 min
222

रज़ा तुझे लेने की जरूरत नहीं आसमान की ऊंचाइयों को छूने की

बस हौसले के पंख बुलंद कर , सूरज तेरा मुकद्दर होगा,


यूँ न बैठ उन पंछिओं को उड़ते हुए, जब की तेरी

तकदीर सितारों में लिखी हो


मक़ामों को हासिल करना आदत बन जाएगी,

बस सिर्फ देर हैं ज़ोर आज़माने की


दुनिया से राजामंदी की क्या ज़रूरत तुझे

क्यों फ़िक्र है ज़माने की ?


रज़ा तुझे लेने जरूररत नहीं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract