"सुन लो जरा, मेरी ब्यथा"
"सुन लो जरा, मेरी ब्यथा"
मैं सर्द रात की ठिठुरन हूँ, तुम गर्मी वाली आंच प्रिये।
मैं मरता सड़क का राहगीर, तुम सिस्टम वाली जांच प्रिये।।
मैं पटरी पर बिखरी रोटी, तुम उम्मीदों की चटनी हो।
मैं हूँ कमजोरी का प्रतीक, तुम सुपर-पावर का शासन हो।।
मैं रोज भूख से मरता हूँ, तुम लेट पहुँचता राशन हो।
मैं बाज़ारों का सन्नाटा, तुम पिक्चर हॉल की रौनक हो।।
हर धूप -आग को सह लूंगा, ना मांगूंगा मैं ठंडी -छाँव प्रिये।
बस कर दो ये अहसान सुनो, भिजवा दो मुझ को गाँव प्रिये।।
मैं सर्द रात की ठिठुरन हूँ, तुम गर्मी वाली आंच प्रिये ।।
