Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Fantasy Thriller
डर के
गर्भ में
सिर्फ
और
केवल
डर
होता है
बाकी
कुछ भी
नहीं
होता
प्रेम के
भीतर
लेकिन
शून्य
होता है।
प्रेम
सही मायने में...
प्रेम और नफरत
प्रेम को परिभ...
नजरिया
कहानी की परिभ...
अब खड़ा हूं अकेला बेहद तन्हा एक सुकून के इंतजार में.........!! अब खड़ा हूं अकेला बेहद तन्हा एक सुकून के इंतजार में.........!!
चाक पर चक्कर में पड़ा मिट्टी का नर्म गोला। चाक पर चक्कर में पड़ा मिट्टी का नर्म गोला।
चढा रहा श्रद्धा पुष्प तुमको समर्पित कर श्री गुरु चरणों में । चढा रहा श्रद्धा पुष्प तुमको समर्पित कर श्री गुरु चरणों में ।
प्रतीक जीवंत हो उठे हैं और जीवंतता इतिहास की तरफ सरक रही है. प्रतीक जीवंत हो उठे हैं और जीवंतता इतिहास की तरफ सरक रही है.
राम बनना आसान नहीं, पल-पल मुश्किलों से है सामना, राम बनना आसान नहीं, पल-पल मुश्किलों से है सामना,
आखिर कब तक मौन रहोगे कब तक यूँ बेचैन रहोगे। आखिर कब तक मौन रहोगे कब तक यूँ बेचैन रहोगे।
आंधी ने उड़ते-उड़ते कहा देखो पक्षीराज तुम्हारा खेल खत्म हुआ। आंधी ने उड़ते-उड़ते कहा देखो पक्षीराज तुम्हारा खेल खत्म हुआ।
कभी अभिमान नहीं करती है बस ! अपना झंडा बुलंद करती है। कभी अभिमान नहीं करती है बस ! अपना झंडा बुलंद करती है।
हरियाली प्राणों की बंजर बिन प्रहार जब चुभते खंजर हरियाली प्राणों की बंजर बिन प्रहार जब चुभते खंजर
सच झूठ से ऊंचा, फिर भी सच का उड़ता मज़ाक, सच की खामोशी को दबा रहा है झूठ की आवाज़, सच झूठ से ऊंचा, फिर भी सच का उड़ता मज़ाक, सच की खामोशी को दबा रहा है झूठ की आ...
लबादा ओढ़े रिश्ता खतरनाक होता है बहुत हीं खतरनाक। लबादा ओढ़े रिश्ता खतरनाक होता है बहुत हीं खतरनाक।
मेघ देखूं ,जल देखूं, दर्पण देखूं हाथों के कंगन खनकते, संवरते, और टूट जाते मेघ देखूं ,जल देखूं, दर्पण देखूं हाथों के कंगन खनकते, संवरते, और टूट जाते
छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता। छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता।
बहुत कराहते हैं हम संसार ने हमें क्या दिया? बहुत कराहते हैं हम संसार ने हमें क्या दिया?
अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो
ऐ गगन के चाँद आज मत तुम देर लगाना! आज तो साजन ने भी साथ देने का ठाना ऐ गगन के चाँद आज मत तुम देर लगाना! आज तो साजन ने भी साथ देने का ठाना
भ्रम का शिकार बन गुमराह न हो जाओ, मानव तन जब मिल गया तो मानवता का धर्म निभाओ। भ्रम का शिकार बन गुमराह न हो जाओ, मानव तन जब मिल गया तो मानवता का धर्म ...
शरद पूर्णिमा के चाँद को देख मन हर्षा अम्बर से होगी आज अमृत वर्षा। शरद पूर्णिमा के चाँद को देख मन हर्षा अम्बर से होगी आज अमृत वर्षा।
शीत में करे संग्रहण ताप में होता हिमद्रवण। शीत में करे संग्रहण ताप में होता हिमद्रवण।
ख्वाहिश है नीलगगन में उन्मुक्त उड़ान भरने की l ख्वाहिश है नीलगगन में उन्मुक्त उड़ान भरने की l