STORYMIRROR

Rangoli Mishra

Abstract

2  

Rangoli Mishra

Abstract

शरद की पूनम

शरद की पूनम

1 min
409

बहुत रातों के बाद

आज तारों को सुलाने

पूनम आई है।


थके हुए हैं

जागे हुए हैं

कई रातों के

अभी अभी अमावस को

सजा कर आए हैं।


कई तो घूंघट कर

सेज पर जा बैठे हैं

चाँद लीला की रास लीला होगी

आज शरद पूर्णिमा की रात है।


आज सायों में भी बात है

आज कान्हा रास की रात है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract