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Manju Saini

Inspirational

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Manju Saini

Inspirational

शीर्षक: हिंदी मुझसे रूठ गई

शीर्षक: हिंदी मुझसे रूठ गई

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क्यों मेरी हिंदी मुझसे रूठ चली

कुछ जतन लगाना होगा सब

हम सब को मिलकर ही अपनी

मातृभाषा के अस्तित्व को बचाना होगा

उद्गम स्थल पर ही खोई सी चल रही हैं

न जाने क्यों मेरी हिंदी रूठ चली हैं

मेरी ही हिंदी मुझसे ही रुठी हुई है

जिम्मेदारी तो मेरी भी थी जिसमें मैं

खरी नहीं उतर पाई हूँ क्योंकि मैं भी तो

पाश्चात्य सभ्यता को आज अपनाई हूँ

स्थापित होकर भी उसको मेरी जरूरत हैं

बस समय से मैं यही समझना भी चाहती हूँ

विस्थापित सी न हो बस याद दिलाना चाहती हूँ

अपनों के बीच अपनी रहे बस लाज रखना चाहती हूँ

आंग्ल भाषा के पीछे दौड़े अपनी हिंदी अपनानी हैं

भयाक्रांत हो अंग्रेजी अब ऐसी व्यवस्था बनानी हैं

अपनी हिंदी रूठ गई अब उसको ही अपनानी हैं

फिर से वही सम्मान दिलाना हैं फिर से अपनाना है

निर्जन पथ पर निकल पड़ी उसको वापिस लाना हैं

हिंदी मुझसे रूठ गई उसको ही अब मनाना हैं।



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