शीर्षक:एक आस लिए
शीर्षक:एक आस लिए
एक आस लिए… !
बनाकर दीये मिट्टी से एक आस इसने पाली हैं
सोच कर यही इसने बनाया कि घर घर दीवाली हैं
मिट्टी को देकर रूप एक आस उसमें डाली हैं
तेल की बाती से रोशन की एक आस उसमें डाली हैं
एक आस लिए… !
बना कर दीये मिट्टी के सोचा दीवाली मनानी हैं
बस अपनी मेहनत से जरा सी आस पाली है
लिए है आस आँखों में कि मेहनत समझो उसकी तुम
इस बरस आओ और लेकर जाओ दिए उसके तुम
एक आस लिए…!
मेरी मेहनत खरीदो तो मेरे घर में भी दीवाली
मेरे बच्चों को भी मिले खील भरी थाली
आपके घर हो मेरा हर दीया रोशन
मेरे बच्चों की आँखों में भी हो चमक रोशन
एक आस लिए… !
मानो तो समझोगे मेरी मेहनत की कीमत तुम
यदि समझोगे तो सोचोगे मेरे घर भी दीवाली है
यही वादा करो मिलकर कि दिए तो मिट्टी के ही हो
खाये कसम करें वादा की पूजा अपनी मिट्टी से ही हो
एक आस लिए… !
