शब्दों का कारवां
शब्दों का कारवां
दिल के समंदर में जो जज्बात पलते हैं,
वो कागज़ पर बनकर स्याही निकलते हैं।
दुनिया जिसे महज़ कुछ पन्ने समझती है,
वहाँ मेरी खामोशियों के चिराग जलते हैं।
कभी दर्द बनकर पन्नों पर बिखर जाती हूँ,
कभी उम्मीद की नई एक सुबह लाती हूँ।
कलम जब हाथ में थामती हूँ मैं अपनी,
एक नई दुनिया, एक नया जहां बनाती हूँ।
कहानियों का ये सफर, ये शब्दों का कारवां,
यही तो है मेरी पहचान, मेरा आशियाना।
हर एक लफ्ज़ में मेरी रूह बसती है,
बस इसी तरह चाहती हूँ दिलों में उतर जाना।
