ravindra kumar
Comedy
जादूगरी प्रशाधनों की
उचित अनुचित संसाधनों की
कुछ सुंदर बिंदिया सजाना
पायल की छम छम बजाना।
फॉसिल की घड़ियां सजाना
गेस की महक जगाना
जारा के आवरण चढ़ाना
रे बन से नयन मटकाना।
ओप्पो वीवो के फ़िल्टर लगाना
न आया कोई काम
तू तब भी चुड़ैल थी
अब भी चुड़ैल है।
सौंदर्य
खामोशी भी कुछ...
कैसे लिखूं तु...
इंतजार
ये आजकल की पीढ़ी का, जाने ध्यान कहां रहता है? ना कीमत वक्त, पैसे या मेहनत की! ये आजकल की पीढ़ी का, जाने ध्यान कहां रहता है? ना कीमत वक्त, पैसे या मेहनत की!
ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की। ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की।
रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाये/ चीखे रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाय...
वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन। वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन...
सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती, सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती,
प्रबंध और उसकी इच्छा तो जरूर पूरी करुंगा। प्रबंध और उसकी इच्छा तो जरूर पूरी करुंगा।
बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की सूझी। बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की ...
कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई। कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई।
न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग
बस काम ही काम, तनिक न आराम न अवकाश न चिकित्सा सुविधा या कोई भत्ता। बस काम ही काम, तनिक न आराम न अवकाश न चिकित्सा सुविधा या कोई भत्ता।
अब आप ही बताइए इसमें मेरा क्या है दोष। अब आप ही बताइए इसमें मेरा क्या है दोष।
आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सांसों से ज्यादा जरूरत ... आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सां...
हुआ ऐसा 4,5 मकान छोड़ के सामने वाले घर में मैंने देखा किसी को लंबे बाल आगे लेकर पोंछते हुआ ऐसा 4,5 मकान छोड़ के सामने वाले घर में मैंने देखा किसी को लंबे बाल आगे लेकर ...
अभी अभी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का फोन मेरे पास आया। अभी अभी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का फोन मेरे पास आया।
प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था, प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था,
हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं. हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं.
हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा। हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा।
जाओ कर लो ये शादी, बन जाओ पत्नी के डमरु। शा जाओ कर लो ये शादी, बन जाओ पत्नी के डमरु। शा
मेरे कामों का लेखा जोखा, तुमको बतलाती हूं l आओ तुमको अच्छे से मैं, क ख ग सिखलाती हूँ मेरे कामों का लेखा जोखा, तुमको बतलाती हूं l आओ तुमको अच्छे से मैं, क ख ...
एक दिन मामला ऐसा बिगड़ा कि पड़ोसी पड़ोसन का हो गया आपसी झगड़ा। एक दिन मामला ऐसा बिगड़ा कि पड़ोसी पड़ोसन का हो गया आपसी झगड़ा।